उत्तर भारत में स्थित उत्तर प्रदेश प्रमुख राज्यों में से एक है। यह राज्य अपनी विविध संस्कृति और अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता जाता है। यहां का गौरवशाली इतिहास इसे अन्य राज्यों से अलग बनाता है, जो कि हजारों सालों पुराना है।
अतीत के पन्नों पर गौर करें, तो प्रदेश को इतिहास में अलग-अलग नामों से जाना जाता था। इस कड़ी में उत्तर वैदिक काल के समय राज्य का नाम अलग-अलग हुआ करता था। इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर उत्तर वैदिक काल में प्रदेश को किन-किन नाम से जाना जाता था।
उत्तर प्रदेश में कुल जिले और मंडल
उत्तर प्रदेश भारत में सबसे अधिक जिले वाला राज्य है। यहां कुल 75 जिले हैं, जो कि 18 मंडलों में आते हैं। इसके अतिरिक्त यहां 351 तहसील, 17 नगर निगम, 75 नगर पंचायत, 826 सामुदायिक विकास खंड और 58 हजार से अधिक ग्राम पंचायत मौजूद हैं।
उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा और सबसे छोटा जिला
उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े जिले की बात करें, तो यह लखीमपुर खीरी है, जो कि 7680 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह जिला मेंढक आकार में बने प्रसिद्ध शिव मंदिर के लिए जाना जाता है। वहीं, सबसे छोटे जिले की बात करें, तो यह हापुड़ शहर है, जो कि 660 वर्ग किलोमीटर में है। इस शहर को हम स्टील सिटी के रूप में भी जानते हैं।
कब से कब तक था उत्तर वैदिक काल
उत्तर वैदिक काल 1000 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व तक चला। यह काल ऋग्वैदिक काल (1500 ईसा पूर्व - 1000 ईसा पूर्व) के बाद आया और इसी समय भारत में कृषि, लोहे के उपयोग, सामाजिक संरचना में बदलाव और महाजनपदों के उदय जैसी महत्त्वपूर्ण घटनाएं घटीं।
इन नामों से जाना जाता था उत्तर प्रदेश
-कुरु जनपद (आधुनिक मेरठ, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश का क्षेत्र)
कुरु जनपद सबसे प्रमुख था और इसकी राजधानी इंद्रप्रस्थ (आधुनिक दिल्ली) या हस्तिनापुर (मेरठ के पास) थी। इसे वैदिक संस्कृति का केंद्र माना जाता था।
-पांचाल जनपद (आधुनिक बरेली, बदायूं, फर्रुखाबाद, कन्नौज)
उस समय यह विद्या और संस्कृति का प्रमुख केंद्र था। साथ ही,ऋषि याज्ञवल्क्य और शांडिल्य जैसे विद्वानों का संबंध इसी क्षेत्र से था।
-कोसल जनपद (आधुनिक अयोध्या, फैजाबाद, गोंडा, बहराइच)
यह क्षेत्र आगे चलकर भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या के रूप में प्रसिद्ध हुआ। इसकी राजधानी की बात करें, तो यह श्रावस्ती और अयोध्या थी।
-काशी जनपद (आधुनिक वाराणसी और आसपास का क्षेत्र)
यह क्षेत्र धार्मिक और व्यापारिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हुआ करता था। वाराणसी को ज्ञान और शिक्षा का केंद्र माना जाता था।
-विदेह जनपद (आंशिक रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के मिथिला क्षेत्र में फैला था)
इसका संबंध ऋषि याज्ञवल्क्य और मिथिला के जनक राजाओं से हुआ करता था।
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