माधव नेशनल पार्क किस राज्य में है स्थित? किसके नाम पर रखा गया है नाम
माधव नेशनल पार्क मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित है। यह पार्क पहले शिवपुरी नेशनल पार्क नाम से जाना जाता था। साल 1958 में इसका नाम ग्वालियर राजघराने के माधव राव सिंधिया के सम्मान में “माधव नेशनल पार्क” रखा गया। 2025 में इसे भारत का 58वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया।
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित माधव नेशनल पार्क (Madhav National Park) सिर्फ एक नेशनल पार्क नहीं, बल्कि इतिहास, जंगल और वन्यजीवों का खूबसूरत संगम है। झीलों, पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा यह पार्क मध्य भारत की सबसे खास वन्यजीव स्थलों में गिना जाता है।
कभी राजाओं का शिकारगाह था यह क्षेत्र
आज जिस जंगल में वन्यजीव सुरक्षित घूमते नजर आते हैं, वहां कभी सिंधिया राजघराने के शिकार अभियान चला करते थे। मुगल शासकों और ग्वालियर राजघराने से जुड़ा यह क्षेत्र पहले “शिवपुरी नेशनल पार्क” कहलाता था। बाद में 1958 में इसका नाम बदलकर माधव राव सिंधिया के नाम पर “माधव नेशनल पार्क” कर दिया गया।
साल 2025 में मिला बड़ा सम्मान
मार्च 2025 में इस पार्क को भारत का 58वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। इसके साथ ही यह मध्य प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व बन गया। इस फैसले ने माधव नेशनल पार्क को देश के प्रमुख टाइगर संरक्षण क्षेत्रों की सूची में ला खड़ा किया।
बाघ सहित वन्यजीवों की भरमार
यह पार्क जैव विविधता के लिए बेहद समृद्ध माना जाता है। यहां बाघ, तेंदुआ, नीलगाय, चिंकारा, सांभर, ब्लैकबक और स्लॉथ बियर जैसे कई वन्यजीव पाए जाते हैं। सर्दियों में पार्क का नजारा और भी खास हो जाता है, जब दूर देशों से आने वाले प्रवासी पक्षी यहां की झीलों में डेरा डालते हैं। पेंटेड स्टॉर्क, पिनटेल, टील और व्हाइट आइबिस जैसे पक्षी पर्यटकों को खूब आकर्षित करते हैं।
सख्या सागर बनाता है इसे और खास
पार्क के बीचोंबीच मौजूद सख्या सागर जलाशय इसकी सबसे बड़ी पहचान है। यह केवल खूबसूरत ही नहीं, बल्कि रामसर साइट के रूप में अंतरराष्ट्रीय महत्व भी रखता है। झील, जंगल और खुले घास के मैदान मिलकर यहां ऐसा प्राकृतिक दृश्य बनाते हैं, जो वन्यजीव प्रेमियों और प्रकृति फोटोग्राफरों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह आर्टिकल
इस आर्टिकल के माध्यम से हमनें आज माधव नेशनल पार्क के बारें में विस्तार से पढ़ा, जो प्रतियोगी परीक्षाओं के नजरिये से काफी महत्वपूर्ण है, बताते चलें कि साल 2026 के संघ लोक सेवा आयोग की प्री की परीक्षा में भी इससे जुड़ा एक सवाल पूछा गया था, ऐसे ही देश में आयोजित होने वाली परीक्षाओं की दृष्टि से यह टॉपिक और भी खास हो जाता है।
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