अवध, अयोध्या और गंगा-जमुनी तहजीब से बना है उत्तर प्रदेश का प्रतीक चिह्न, जानें पूरी जानकारी

Last Updated: Jun 15, 2026, 12:03 IST

उत्तर प्रदेश का अपना आधिकारिक राजकीय प्रतीक चिह्न है। यह चिह्न अपने आप में विविधता से भरा हुआ है, जिसमें गंगा-जमुनी तहजीब, अवध और अयोध्या से जुड़ाव देखने को मिलता है। इस लेख में हम राज्य के प्रतीक चिह्न के बारे में विस्तार से जानेंगे। 

यूपी का प्रतीक चिह्न
यूपी का प्रतीक चिह्न

उत्तर प्रदेश देश का चौथा सबसे बड़ा राज्य है। यह विविधताओं से भरा हुआ है, जहां की सांस्कृतिक विरासत और अनूठी परंपराएं इसे अन्य राज्यों से अलग बनाती हैं। इस कड़ी में राज्य का प्रतीक चिह्न भी शामिल है, जिसमें गंगा-जमुनी तहजीब, अवध और अयोध्या का संगम देखने को मिलता है। यही वजह है कि इस प्रतीक चिह्न को भारत के सबसे सुंदर राज्य प्रतीक चिह्नों में शामिल करने के साथ सबसे अर्थपूर्ण राज्य चिह्न के रूप में भी पहचान मिली है। इस लेख में हम इस बारे में विस्तार से जानेंगे।

यूपी के प्रतीक चिह्न में क्या-क्या है शामिल 

उत्तर प्रदेश का प्रतीक चिह्न एक वृत्त(Circle) के आकार का बना हुआ है। इसके अंदर अलग-अलग तत्व दिखाई देते हैं, जो कि इस प्रकार हैंः

दो मछलियां

सर्कल के निचले हिस्से में आमने-सामने दो मछलियों की आकृतियां देखने को मिलती हैं, जो कि अवध के नवाबों के शासन का प्रतीक हैं। इसे लखनऊ स्थित रूमी दरवाजे से लिया गया है। मध्यकाल में अवध के शासकों के शाही निशान में 'माह-ओ-मरातिब' यानि कि  मछली का सम्मान शामिल किया जाता था। अवध के नवाब इसे अपनी संप्रभुता और शक्ति का प्रतीक के रूप में मान्यता देते थे। यह तत्त्व यूपी की गंगा-जमुनी तहजीब और एकता को भी दर्शाता है।

तीर और धनुष 

सर्कल में ऊपरी हिस्से में हमें एक तना हुआ धनुष और उस पर चढ़ा हुआ तीर दिखाई देता है। यह धनुष-बाण भगवान श्रीराम का प्रतीक है, जिनका संबंध अयोध्या से है। वहीं, अयोध्या राज्य की प्राचीन संस्कृति और शौर्य को दर्शाता है।

दो तरंग रेखाएं 

तीर धनुष और मछलियों के बीच हमें दो तरंग रेखाएं भी देखने को मिलती हैं। दरअसल, ये रेखाएं यूपी की दो प्रमुख नदियां गंगा और यमुना को दर्शाती हैं, जो कि गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक हैं।

दो सितारे

प्रतीक चिह्न में दिये गए दो सितारे आगरा और अवध प्रांत को दर्शाते हैं। 1902 में यूपी को आगरा एवं अवध का संयुक्त प्रांत नाम दिया गया था। क्योंकि, उस समय इन दो अलग-अलग प्रांतों को मिला दिया गया था।

क्या है प्रतीक चिह्न का इतिहास 

उत्तर प्रदेश के राजकीय प्रतीक चिह्न को ब्रिटिश काल में 1938 में तैयार किया गया था। उस समय प्रांतीय सरकार के साथ-साथ तत्कालीन गवर्नर ने यूपी की तीन बड़ी ऐतिहासिक विरासतों को प्रतीक चिह्न में शामिल करने का निर्णय लिया था, जिससे पूरी राज्य की जनता का सही प्रतिनिधित्व हो सके। इसमें धर्म से लेकर प्रकृति को भी शामिल किया गया था। यही वजह है कि आज भी यह प्रतीक चिह्न यूपी के सरकारी दस्तावेजों से लेकर भवन और लेटरहेड में देखने को मिल जाएगा। 

यूपी के अन्य राजकीय प्रतीक 

अब हम यूपी के अन्य राजकीय प्रतीक चिह्न के बारे में भी जान लेते हैं, जिन्हें लेकर अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में सवाल पूछे जाते हैं।

यूपी का राजकीय पशु- यूपी का राजकीय पशु बारहसिंघा या दलदली हिरण है। यह यूपी के तराई क्षेत्रों में पाया जाता है, जो कि एक संकटग्रस्त प्रजाति है।

यूपी का राजकीय पक्षीः यूपी का राजकीय पक्षी सारस क्रेन है, जो कि दुनिया का सबसे बड़ा उड़ने वाला पक्षी है। यह प्रेम और निष्ठा के लिए जाना जाता है।

यूपी का राजकीय वृक्षः यूपी का राजकीय वृक्ष अशोक है, जो कि पवित्रता और पर्यावरण की सुंदरता के लिए जाना जाता है।

यूपी का राजकीय पुष्पः यूपी का राजकीय पुष्प पलाश या टेसू है, जिसके लाल और नारंगी फूल होते हैं और ये यूपी के जंगलों को चमकाने का काम करते हैं।

यूपी का राजकीय खेलः यूपी का राजकीय खेल हॉकी है, क्योंकि हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से थे।


Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jun 15, 2026, 12:03 IST

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