भारत में कहां है ‘लुटेरों की गुफा’, क्या है इतिहास, यहां जानें सब कुछ
आपने भारत की अलग-अलग गुफाओं के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में एक गुफा ऐसी भी है, जिसे चोरों की गुफा भी कहा जाता है। इस लेख में हम इस बारे में बारे में विस्तार से जानेंगे।
भारत में आपने अलग-अलग गुफाओं के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसी गुफा भी है, जिसे चोरों की गुफा कहा जाता है। यह गुफा पहाड़ों की गोद में प्राकृतिक वादियों के बीच में बनी हुई है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं।
कौन-सी है चोरों की गुफा
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्राकृतिक गुफा है, जिसे Robber’s Cave कहा जाता है। स्थानीय लोग इसे 'गुच्छू पानी' के नाम से भी जानते हैं। यह पर्यटकों के बीच एक बहुत ही लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट और एडवेंचर डेस्टिनेशन है।
रॉबर्स केव की भौगोलिक बनावट
यह कोई साधारण गुफा नहीं है, बल्कि चूना पत्थर से बनी एक प्राकृतिक संकरी घाटी है, जिसकी लंबाई लगभग 600 मीटर है। इस गुफा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके बिल्कुल बीचों-बीच से एक ठंडे पानी की नदी बहती है। पर्यटकों को गुफा के अंदर जाने के लिए इसी घुटनों तक भरे ठंडे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। जैसे-जैसे आप गुफा के अंदर जाते हैं, दोनों तरफ की चट्टानें इतनी ऊंची और संकरी हो जाती हैं कि आसमान भी ठीक से दिखाई नहीं देता। गुफा के बिल्कुल अंत में एक झरना भी गिरता है।
'रॉबर्स केव' नाम के पीछे का क्या है इतिहास
इस जगह का असली नाम 'गुच्छू पानी' है। गुच्छू का मतलब छिपा हुआ या गुप्त होता है, लेकिन इसे 'रॉबर्स केव' यानि लुटेरों की गुफा कहा जाता है। इसे यह नाम अंग्रेजों ने दिया था। स्थानीय इतिहास और लोककथाओं के अनुसार, ब्रिटिश काल में भारत के कुख्यात डाकू अंग्रेजी पुलिस से बचने के लिए इसी गुफा का इस्तेमाल छिपने के ठिकाने के रूप में करते थे।
इस गुफा के अंदर के रास्ते इतने भूलभुलैया जैसे और संकरे थे कि पुलिस के लिए डाकुओं को खोजना लगभग असंभव होता था। डाकू अपना लूटा हुआ खजाना भी इन्हीं गुफाओं के अंधेरे कोनों में छिपाकर रखते थे। इसी वजह से अंग्रेजों ने इसे 'रॉबर्स केव' कहना शुरू कर दिया।
क्या है पानी के गायब होने का रहस्य
इस गुफा से जुड़ा एक बड़ा प्राकृतिक रहस्य इसका 'गायब होने वाला पानी' है। जब आप गुफा के अंदर पानी की धारा में चलते हुए आगे बढ़ते हैं, तो एक जगह ऐसी आती है, जहां नदी का पानी अचानक पत्थरों के नीचे जमीन में पूरी तरह गायब हो जाता है। वहां केवल सूखे पत्थर दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ मीटर आगे चलने पर वही पानी रहस्यमयी तरीके से दोबारा सतह पर बहता हुआ नजर आने लगता है।
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