सरकारी अधिकारियों की कुर्सी पर क्यों होता है सफेद तौलिया, ब्रिटिश काल की है परंपरा

Last Updated: Apr 30, 2026, 18:29 IST

आपने अक्सर सरकारी अधिकारियों की कुर्सियों पर सफेद तोलिया देखा होगा। यह तौलिया सिर्फ सजावट के लिए नहीं होता है, बल्कि ब्रिटिश काल से परंपरा में बना हुआ है। आज भी इस परंपरा को पालन किया जाता है। 

सरकारी कुर्सी पर सफेद तौलिया क्यों ?
सरकारी कुर्सी पर सफेद तौलिया क्यों ?

आपने अक्सर सरकारी कार्यालयों में सरकारी अधिकारियों की सीट पर सफेद तौलिया देखा होगा। यह तौलिया सिर्फ सजावट के लिए नहीं बिछा होता है, बल्कि यह ब्रिटिश काल से परंपरा के तौर पर चला आ रहा है। यह प्रशासनिक व्यवस्था में एक विशिष्ट परंपरा रहा है, जो कि आज भी कई जगहों पर प्रोटोकॉल और शान के तौर पर देखी जा सकता है। हालांकि, वर्तमान में इस परंपरा को ‘एर्गोनोमिक’ कुर्सियों से बदल दिया गया है।

अंग्रेजों के समय हुई थी शुरुआत

इस परंपरा की शुरुआत ब्रिटिश शासन के समय हुई थी। क्योंकि, उस समय कार्यालयों में एयर कंडीशनर (AC) नहीं हुआ करते थे और अधिकारी भारी कोट-पेंट पहनते थे। ऐसे में गर्म मौसम में लकड़ी या चमड़े की कुर्सियों पर बैठने के दौरान अधिकारियों को पसीना आता था। इसे देखते हुए पसीने को सोखने और कुर्सी को खराब होने से बचाने के लिए तौलिए का इस्तेमाल होता था।

क्या था व्यावहारिक कारण

उस दौर में सरकारी दफ्तरों में कुर्सियां अक्सर लकड़ी, बेंत या भारी मखमल की हुआ करती थीं, जिन्हें रोज धोना बहुत मुश्किल था। ऐसे में कुर्सियों पर सफेद तौलिया बिछा दिया जाता था, जिसे गंदा होने पर बदल देते थे। 

समय के साथ बनी पहचान

सरकारी कार्यालयों में उस समय सफेद तौलिया एक पद की पहचान बन गई थी। यदि किसी कुर्सी पर सफेद तौलिया होता था, तो कम पढ़े-लिखे लोग समझ जाते थे कि सामने वाला व्यक्ति बड़ा सरकारी अधिकारी है। इस वजह से हर सरकारी कार्यायल में इसे अपनाया जाने लगा और अधिकारियों की सीट की पहचान सफेद तौलिया बन गया था।

वर्तमान में क्या है स्थिति

वर्तमान में कई सराकरी कार्यालयों में एग्रोनोमिक कुर्सियां आ गई हैं। ये कुर्सियां जाली वाली होती हैं, जिनमें पीछे की तरफ जाली लगी होती है। इससे बैठने वाले व्यक्ति को पसीना नहीं आता है। वहीं, कार्यालयों में पहुंचने वाले युवा अधिकारी इस ब्रिटिश परंपरा को भी खत्म भी कर रहे हैं। 

कई राज्यों सरकारों ने खत्म की है परंपरा

बीते कुछ वर्षों में कई राज्य सरकारों ने इस वीआईपी परंपरा को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जिससे दफ्तर में वीआईपी कल्चर खत्म हो सके। इसे लेकर राज्य सरकारों ने लिखित और मौखिक रूप से निर्देश भी जारी किये हैं।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

... Read More
First Published: Apr 30, 2026, 18:29 IST

आप जागरण जोश पर भारत, विश्व समाचार, खेल के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए समसामयिक सामान्य ज्ञान, सूची, जीके हिंदी और क्विज प्राप्त कर सकते है. आप यहां से कर्रेंट अफेयर्स ऐप डाउनलोड करें.

Trending

Latest Education News