आपने कई बार कोल्ड ड्रिंक या सोडा खरीदा होगा। लेकिन, कभी आपने नोटिस किया है कि इन सभी कोल्ड ड्रिंक्स की बोतल नीचे से एक जैसी ही होती है। चाहे आप किसी भी कंपनी या साइज की बोलते खरीद ले सभी के डिजाइन में आपको यह चीज कॉमन मिलेगी। वहीं, पानी की बोतले नीचे से आम बोतलों की तरह प्लेन यानी सपाट होती है। कोल्ड ड्रिंक की बोतलों में खास डिजाइन होता है, जिसमें नीचे पांच या तीन बंप निकल होते हैं। यह बोतले नीचे से फ्लैट नहीं होते हैं।
क्यों खास तरह से डिजाइन की जाती है कोल्ड ड्रिंक की बोतल
इसकी वजह यह है कि इसमें गैस होती है और सॉफ्ट ड्रिंक की जिन बोतलों में फ़िज़ होता है, उनका डिज़ाइन खास होता है। दरअसल, होता यह है कि जब सॉफ्ट ड्रिंक को ठंडा किया जाता है, तो उसका वॉल्यूम बदलता रहता है। साथ ही, गैस की वजह से इसका बेस खास तरीके से डिजाइन किया जाता है।
इससे बोतल ड्रिंक के वॉल्यूम के हिसाब से एडजस्ट हो जाती है और गैस का प्रेशर भी आसानी से कंट्रोल हो जाता है। इस खास बोतल को कॉरगेशन कहते हैं। साथ ही, चूंकि यह कार्बोनेटेड होती है, इसलिए नीचे की तरफ प्रेशर बनता है। यह डिजाइन बोतलों को आंतरिक कार्बोनेशन दबाव को बेहतर ढंग से झेलने की अनुमति देता है, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित होती है
क्यों टाइट होता है नीचे का हिस्सा
इसके अलावा, आपने देखा होगा कि यह हिस्सा भी काफी टाइट होता है, क्योंकि जब बोतल को कुचला जाता है, तो ऊपरी हिस्सा आसानी से घूम जाता है, लेकिन निचला हिस्सा मजबूत होता है। इसलिए सॉफ्ट ड्रिंक की बोतल को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि कोई दिक्कत न हो।
क्या है इसके पीछे का इतिहास
सोडा और सॉफ्ट ड्रिंक की बोतलों में डिजाइन का किस्सा काफी दिलचस्प रहा है। 19वीं सदी में, कांच की बोतलें ज्यादातर सपाट होती थी। हालांकि, शुरुआती डिज़ाइनों में कुछ चुनौतियां थीं। बोतल कार्बोनेशन दबाव के कारण टूटने की संभावना थी क्योंकि वे कांच से बनी थीं। कार्बोनेटेड ड्रिंक्स की बढ़ती मांग के साथ, डिजाइन में बदलाव किए गए और इसे मजबूत बनाया गया। 20वीं सदी की शुरुआत में "कॉड-नेक" बोतल एक आखिरी समाधान थी जिसमें बोतल को सील करने और गैस को बाहर निकलने से रोकने के लिए रबर वॉशर था। उस वक्त कांच की बोतलें सपाट होती थी, लेकिन इससे दबाव की समस्या खत्म नहीं हुई। बदलते समय के साथ कांच की बोतल प्लास्टिक की बोतल में बदल गई।
डिजाइन के पीछे का साइंस
कोल्ड ड्रिंक्स की बोतल नीचे से समतल नहीं होते हैं। जब कार्बोनेटेड ड्रिंक्स को ठंडा किया जाता है, तो ड्रिंक के अंदर घुली हुई गैसें उस तापमान के बदलाव से सिकुड़ सकती हैं। इससे बोतल के दबाव में उतार-चढ़ाव होता है। एक प्लेन बोतल के लिए इस दबाव को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है, जिससे संभावित बोतल टूट सकती है। स्पाइक-बॉटम बोतल का नालीदार डिज़ाइन इसे तापमान बदलने के साथ सुरक्षित रूप से फैलने और सिकुड़ने देता है। यह डिजाइन बोतल में होने वाली अंदरूनी दबाव को आसानी से फैलाता है।
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