धनतेरस और दिवाली के बीच क्यों होता है 1 दिन का अंतर, कहते हैं ‘छोटी दिवाली’
आमतौर पर आपने देखा होगा कि धनतेरस और दिवाली के बीच एक दिन का अंतर होता है। इसे छोटी दिवाली कहा जाता है। क्या आप जानते हैं कि दिवाली और धनतेरस के बीच अंतर क्यों होता है। यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
दिवाली और धनतेरस के बीच अक्सर एक दिन का अंतर होता है। धनतेरस के बाद एक दिन बाद ही दिवाली के पर्व मनाया जाता है। इसे लोग छोटी दिवाली कहते हैं। इसके ठीक एक दिन बाद दिवाली होती है, जिसे लोग बड़ी दिवाली या मुख्य दिवाली कहते हैं। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि आखिर दिवाली और धनतेरस के बीच एक दिन का अंतर क्यों होता है, यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।
हिंदू पंचांग में इस नाम से जाना जाता है यह अंतर
धनतेरस और दिवाली के बीच एक दिन का यह अंतर हिंदू पंचांग की तिथियों की गणना और उनके बीच आने वाले एक महत्त्वपूर्ण पर्व के कारण होता है। इस बीच के दिन को 'नरक चतुर्दशी' या आम बोलचाल में 'छोटी दिवाली' के रूप में मनाया जाता है।
दिवाली और धनतेरस के बीच क्यों होता है अंतर
इस एक दिन के अंतर के पीछे के मुख्य धार्मिक और ज्योतिषीय कारण इस प्रकार हैं:
-दिवाली का पांच दिन का उत्सव कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की 13वीं तिथि यानि त्रयोदशी से शुरू होता है, जिसे धनतेरस यानि धन त्रयोदशी कहा जाता है।
-धनतेरस के ठीक अगले दिन 14वीं तिथि यानि चतुर्दशी आती है।
-चतुर्दशी के बाद 15वीं तिथि यानी 'अमावस्या' आती है, जिस दिन मुख्य दिवाली और महालक्ष्मी पूजन का पर्व मनाया जाता है। क्योंकि, त्रयोदशी (13वें दिन) और अमावस्या (15वें दिन) के बीच चतुर्दशी (14वां दिन) का आना प्राकृतिक है, इसलिए धनतेरस और दिवाली के बीच एक दिन का अंतर रहता है।
छोटी दिवाली का पौराणिक महत्त्व
धनतेरस और दिवाली के बीच पड़ने वाले इस एक दिन का अपना अलग और गहरा धार्मिक महत्त्व है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण और सत्यभामा ने मिलकर 'नरकासुर' नामक असुर का वध किया था और उसके द्वारा बंदी बनाई गई 16 हजार कन्याओं को मुक्त कराया था। बुराई पर इसी जीत के जश्न में इस दिन को नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली के रूप में मनाया जाता है।
तिथियों का घटना और बढ़ना भी है कारण
अंग्रेजी कैलेंडर में हर दिन 24 घंटे का होता है, लेकिन हिंदू पंचांग में तिथियां चंद्रमा की चाल पर निर्भर करती हैं। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे तक की हो सकती है। सूर्योदय के समय जो तिथि होती है, अक्सर उसी के अनुसार व्रत-त्योहार तय होते हैं । कई बार चंद्रमा की चाल के कारण चतुर्दशी तिथि छोटी हो जाती है और उसी दिन अमावस्या भी शुरू हो जाती है।
ऐसी स्थिति में कभी-कभी यह एक दिन का अंतर खत्म भी हो जाता है और छोटी व बड़ी दिवाली एक ही दिन मना ली जाती है। ऐसे में धनतेरस और दिवाली के बीच का यह दिन कोई खाली अंतराल नहीं है, बल्कि यह बुराई के अंत का अहम त्योहार है, जो मुख्य दिवाली को रोशनी के लिए तैयार करता है।
A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.