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Indian Railway: जानें भारतीय रेलवे के Mascot ‘भोलू’ की कहानी

Indian Railway: जब भी आपने भारतीय रेलवे में सफर किया होगा, तो आपने रेलवे स्टेशनों पर रेलवे के शुभंकर(Mascot) भोलू द एलिफेंट के चित्रों को जरूर देखा होगा। लेकिन, क्या आपको पता है कि आखिर रेलवे को यह शुभंकर कैसे और कब मिला। यदि नहीं, तो यह लेख जरूर पढ़ें।

Indian Railway: जानें भारतीय रेलवे के Mascot ‘भोलू’ की कहानी
Indian Railway: जानें भारतीय रेलवे के Mascot ‘भोलू’ की कहानी

Indian Railway: भारतीय रेलवे का देश में बहुत बड़ा नेटवर्क है। इससे प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग सफर करते हैं। इसके खूबसूरत सफर की अनेकों कहानियां हैं, जिसे लोग सफर के बाद सुनाते हैं। लेकिन, क्या आपको भारतीय रेलवे के शुभंकर भोलू हाथी की कहानी पता है। गले में टाई, कोट, टोपी और हाथों में ग्रीन लैंप पकड़े इस हाथी के चित्र को आपने रेलवे के कई स्टेशनों पर बना होगा। यह मास्कट खासतौर पर बच्चों को खूब पसंद आता है। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से भोलू की कहानी बताने जा रहे हैं, जो भारतीय रेलवे की पहचान बन गया है। 

 

रेलवे के 150 साल पूरा होने पर भोलू को मिला जन्म

भारतीय रेलवे ने 2002-2003 में भारतीय रेलवे के 150 साल पूरा होने पर कई कार्यक्रमों की योजना बनाई थी। इसके लिए रेलवे को एक शुभंकर की जरूरत थी। ऐसे में तब भोलू द एलिफेंट नाम के शुभंकर की जरूरत महसूस की गई थी।

 

राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान ने तैयार किया शुभंकर

भोलू हाथी शुभंकर को राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान ने भारतीय रेलवे के साथ मिलकर डिजाइन किया था। वहीं, 16 अप्रैल 2002 को इसका अनावरण किया गया था, जब भोलू ने बंगलुरू सिटी रेलवे स्टेशन पर शाम को कर्नाटक एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। 

 

2003 में स्थायी शुभंकर बनाने का रेलवे ने लिया फैसला

जब भोलू रेलवे का शुभंकर बना, तो इसे बच्चों से लेकर लोगों ने काफी पसंद किया। इसके बाद 24 मार्च 2003 में रेलवे ने इसे अपना आधिकारिक शुभंकर बनाने का फैसला लिया, जिसके बाद से यह भारतीय रेलवे की पहचान बन गया और अब यह अधिकांश रेलवे स्टेशनों पर देखने को मिल जाएगा। 

 

रेलवे अधिकारियों ने भोलू को बताया ईमानदार और हंसमुख

रेलवे का यह शुभंकर लोगों के बीच में काफी लोकप्रिय हुआ। इस संबंध में भारतीय रेलवे ने साल 2003 में आधिकारिक रूप से बयान जारी कर भोलू को नैतिक, जिम्मेदार, ईमानदार और हंसमुख आइकन के रूप में वर्णित किया था। भोलू के हाथ में  हरी बत्ती सुरक्षा और सकारात्मकता के साथ यात्रा करने के इरादे का प्रतीक है। 



2003 में दो रुपये के सिक्के पर मिली जगह

भोलू की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भोलू का आधिकारिक रूप से भारतीय रेलवे का शुभंकर बनने के बाद इसे भारतीय रुपयों पर भी जगह मिली। साल 2003 में भारत सरकार ने दो रुपये  का सिक्का जारी किया था, जिसके पीछे भोलू का चित्र बना हुआ था। यह सिक्का भी उन दिनों काफी चर्चा में रहा था।

 

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