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CBSE Class 12 Hindi Sample Paper 2019

Oct 28, 2018 18:58 IST
    CBSE Class 12 Hindi Sample Paper 2019
    CBSE Class 12 Hindi Sample Paper 2019

    Check CBSE Sample Paper 2019 for Class 12 Hindi Subjects (Core and Elective) along with Answers and Marking Scheme. These Sample Papers are recently published by CBSE. These are based on the latest CBSE Examination Pattern and strictly follows CBSE Blueprint as these papers are issued by the board itself. Generally, Hindi is considered to be an easy subject, but students should understand that a little hard work in this subject can fetch you a better score in their board exam result.

    Students preparing for CBSE Class 12 Hindi Board Exam 2019 should thoroughly study this Sample Paper and its Marking Scheme. After going through these papers, candidates can easily learn the proper way of writing answers in Hindi board exam.

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    Content from CBSE Class 12 Hindi (Core) Sample Papers 2019

    • निर्धारित समय: 3 घंटे

    • अधिकतम अंक: 80

    समान्य निर्देश :

    • इस प्रश्न - पत्र में चार खंड है, क,ख,ग।

    • तीन खंडों के प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है।

    • यथासंभव तीनो खंडों के प्रश्नों के उत्तर क्रमश: लिखिए ।

    खंड क

    निम्नलिखित गद्यांश का पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए

    गंगा दशहरा जब आता है, तो मेरे भीतर कोई सुर बजने लगता है। गंगोत्री पर उनींदी नींद का साया था। और वह सुर मुझे बाहर की ओर खींच रहा था। मैं अचानक उठकर कमरे से बाहर आ गया और ईशावत्र आश्रम से गंगा को अपने पूरे वेग से बहते देखता रहा। उजेरिया रात थी। बर्फ में नहाई भगीरथी चोटियाँ और गंगा का स्वर। उस रात में सिर्फ गंगा का स्वर ही सुनाई दे रहा था। वह स्वर था या कोई सुर। मैं उस सुर में खो सा गया। गंगोत्री से नीचे आ कर वैसा सुर रह भी नहीं जाता। गंगा अपने हर पड़ाव पर एक अलग सुर में नजर आती है। सोचता हूँ कि गंगा ने धरती पर आने के लिए आखिर क्या समय चुना था ? जेठ की तपती दोपहरी में वह आई थी। साल के जिस पड़ाव पर पानी की सबसे ज्यादा जरूरत महसूस होती है, उसी समय आई थी माँ गंगा। दशमी के दिन ही माँ गंगा धरती पर आई थी। दरअसल, भगीरथ ने स्वर्ग में बसी गंगा को धरती पर आने के लिए मना तो लिया था, लेकिन उस समय वह लरजती, गरजती अल्हड़ नदी थी। उन्हें माँ बनाकर भेजा था महादेव ने। | वह अपने स्वर्ग को छोड़कर धरती पर चली आई थीं। स्वर्ग के लिए तो शायद उनका अल्हड़पन ठीक होगा, लेकिन धरती के लिए वह ठीक नहीं था। धरती | के लिए तो माँ गंगा की ही जरूरत थी। वह गंगा जो हम तपते हुए लोगों को तृप्त कर सके। अपने प्रवाह में हमारे सारे पापों को बहाकर ले जाए। हरिद्वार की गंगा का सुर गंगोत्री के सुर से कितना अलग है ?कितनी मैली नजर आती है। गंगा। कैसे डुबकी लगाऊँ। उसकी वजह क्या हम ही तो नहीं है । मैं उस प्रवाह | में आचमन सा करता हूँ। मन ही मन सोचता हूं- हे गंगा मैया, आपकी तरह | हमारे जीवन का प्रवाह भी बहता रहे।

    (क) गद्यांश को पढ़कर उचित शीर्षक लिखिए।

    (ख) ईशावत्र आश्रम से लेखक ने क्या देखा?

    (ग) किसे देखकर लेखक के भीतर सुर बजने लगता है और क्यों?

    (घ) गंगा के स्वर को लेखक सुर क्यो कहता है?

    (ङ) जेठ की तपती दोपहरी में गंगा के धरती पर आने के कारणों को स्पष्ट कीजिए

    (च) धरती के लिए गंगा का अल्हड़पन ठीक क्यों नहीं हो सकता था ?

    (छ) हरिद्वार की गंगा गंगोत्री की गंगा से कैसे अलग है?

    उत्तर (संकेत मूल्य बिन्दु)

    (क) गंगा /गंगा की महिमा आदि (अन्य उचित शीर्षक भी स्वीकार)

    (ख) गंगा को वेग से बहते देखा

    (ग)

    • गंगा को देखकर

    • गंगा के प्रति आस्था

    (घ)

    • गंगा के प्रवाह की ध्वनि की कर्णप्रियता

    • गंगा के प्रति लेखक की आस्था प्रेम आदि

    (ङ)

    • धरती को तृप्त करना

    • जन-मन की प्यास बुझाना

    • धन्य-धान्य से भरपूर करना आदि

    (च)

    • अल्हडपन में गंभीरता और निर्माण का अभाव

    • अल्हडता में गलती होने की संभावना

    (छ)

    • सुर का अलग होना

    • पानी मैला हो जाना आदि

    .

    .

    .

    All the questions are available in the PDF of the Sample Paper

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    Download Answers and Making Scheme of CBSE Sample Paper 2019 – Class 12 Hindi Core

    Content for CBSE Class 12 Hindi (Elective) Sample Papers 2019

    • निर्धारित समय: 3 घंटे

    • अधिकतम अंक : 80

    समान्य निर्देश :

    • इस प्रश्न - पत्र में तीन खंड है, क,ख,ग ।

    • तीन खंडों के प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है ।

    • यथासंभव तीनो खंडों के प्रश्नों के उत्तर क्रमश: लिखिए ।

    खंड-क

    1. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए

    उस दिन बसंत पंचमी थी। सुबह उठते ही कोयल की कूक सुनाई पड़ गई। मन खुश हो गया। इस कोयल ने भी क्या दिन चुना यहाँ आने को । अलसाया सा उठा और अपनी खिड़की से गुलमोहर को देखने लगा। इस उम्मीद में कि शायद कोयल ही दिखलाई पड़ जाए। कोयल तो नहीं दिखी यों उसकी कूक कहीं से आती जाती रही । अब अपने गुलमोहर को देखा तो मन उदास हो गया। इन दिनों यह होता ही है। उसे देखने का मन ही नहीं होता। अजीब बात है कि बसंत आता है तो वह बुझा-बुझा सा नजर आता है। जैसे झर रहा हो वह। उसकी खिलखिलाहट कहीं खो गई हो। एक किस्म की झुंझलाहट होने लगती है। बसंत है या पतझर । बसंत क्या आता है उसका एक-एक पत्ता झरने लगता है। फागुन का महीना चल रहा है। और हम बसंत पंचमी पहले ही मना चुके हैं। कमाल के लोग हैं यहाँ। बसंत पंचमी मना लेते हैं माघ में और बसंत आता है। फागुन के भी बाद चैत्र बैसाख में। माघ और फागुन में तो शिशिर माना जाता है। लेकिन माघ बीतते ही उसे बसंत की आहट सुनाई पड़ने लगती है। बसंत की दस्तक को ही उत्सव में बदल देता है वह उनके लिए तो बसंत पंचमी से ही बसंत शुरू हो जाता है। शास्त्र मानते रहें चैत्र बैसाख में बसंत लेकिन यहाँ का लोक तो फगुनाहट को ही बसंत मानता है। दिल्ली में पेड़ो की कतारें हैं। किसी सड़क से निकलते हुए किसी पेड़ के नीचे से गुजरिए। पीले पत्ते अनायास आपके पैरों तले चरमर करने लगते हैं। कोई-कोई

    पत्ता आपके ऊपर या आसपास गिर सकता है। बसंत का मौसम है और इतने | पीले पत्ते जमीन पर ढेर दिखलाई पड़ते हैं। आप जानना चाहें तो हर पत्ते का एक इतिहास है। वह अपनी पारी खेलकर धरती पर आ चुका है। दिल्ली में यह पीले पत्ते दिखलाई पड़ते हैं और यहाँ से बाहर निकलता हूँ तो खेतो पर पीले सरसों की पीली चादर बिछी दिखलाई पड़ती है। इस पीले पत्ते और उस पीली सरसों में कितना फर्क है ? जिन्दगी के दो अलग अनुभव हैं। एक मन को | उदास करता है। दूसरा मन को खुश करता है। और दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। एक नीम के पेड़ के नीचे खड़ा है |मेरे पैरो के नीचे पीले पत्ते ही पत्ते हैं। लेकिन मैं ऊपर देखता हूँ, तो नये हरे पत्ते नजर आते हैं। ये पीले पत्ते अपनी | जिंदगी जी चके हैं। वे अगर इाल पर अड़े रहते तो नये पत्तों के लिए जगह ही नहीं होती। ऐसे ही किसी वक्त में कभी इन पीले पत्तों को भी किसी ने जगह दी होगी। जिन्दगी ऐसे ही चलती है। चलने का नाम ही जिन्दगी है।

    (क) गद्यांश को पढ़कर एक उचित शीर्षक लिखिए।

    (ख) गुलमोहर को देखकर लेखक का मन उदास क्यों हो गया ?

    (ग) भारत के लोगों को कमाल क्यों कहा गया है?

    (घ) हर पत्ते का एक इतिहास है - कैसे?

    (ङ) लेखक पीले पत्ते और पीली सरसों में किस प्रकार का अंतर पाता है - स्पष्ट कीजिए।

    (च) जिन्दगी ऐसे ही चलती है - कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।

     

    उत्तर (संकेत मूल्य बिन्दु)

    खंड - क

    (क) बसंत और जीवन (अन्य उपयुक्त उत्तर भी स्वीकार्य)

    (ख) •बसंत में गुलमोहर पर हरियाली का न होना

    • बुझा बुझा सा दिखना आदि

    (ग) • फागुन के महिना आने से पहले ही

    • बसंत पंचमी मनाना बसंत के आगमन होते ही उत्सव मनाना

    • शास्त्र से अलग फगुनाहट को महत्व देना

    (घ) • जन्म से मृत्यु तक का सफर सभी तय करते हैं।

    • जो आज हरे हैं वे कल पीले होंगे।

    • जो डाल पर आज हैं वे कल नहीं थे।

    (ङ) • पीले पते और पीले सरसों जिन्दगी के दो अनुभव हैं। एक मन को उदास करता है दूसरा मन को खुश करता है।

    (च) • जिन्दगी जन्म से मृत्यु तक का नाम है।

    • संघर्ष और कठिनाई जिन्दगी का हिस्सा

    • जो हरा है वह पीला होगा।

    .

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