सरकारी स्कूल के बच्चे मुफ़्त में कर सकते हैं IIT JEE की तैयारी, जानिये कैसे?

Aug 21, 2018 13:43 IST
    IIT JEE Preparation Tips
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    प्रत्येक वर्ष लाखों विद्यार्थी IITs, NITs, IIITs और GFTIs जैसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला लेने के लिए कठिन परिश्रम करते हैं. सभी छात्र चाहते हैं कि उनका दाखिला IITs, NITs, IIITs और GFTIs में हो. किन्तु इसके लिए विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तरीय इंजीनियरिंग परीक्षा Joint Entrance Examination (JEE Main और JEE Advanced) को Crack करना पड़ता है. इस परीक्षा को क्रैक करने के लिए निजी और सरकारी स्कूल के विद्यार्थी दिन-रात कड़ी मेहनत करते हैं, किन्तु सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के मुँह से अधिकतर कुछ ऐसे कारण सुनने को मिलते हैं जिनसे उन्हें पढ़ाई करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है. आइये जानते हैं कि वे कारण कौन से हैं.

    • कक्षा में बच्चों की ज़्यादा संख्या:

    केंद्र सरकार की निति “निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार” के तहत सरकारी स्कूलों में अधिक बच्चों का दाखिला किया जाता है. जिसके कारण जहाँ हर 30 बच्चों के लिए 1 अध्यापक होना चाहिए वहीँ 1 अध्यापक को 60 बच्चों को पढ़ाना पड़ता है.

    • अध्यापकों का कक्षा में एब्सेंट होना:

    कभी-कभी सरकारी स्कूल के अध्यापकों की ड्यूटी चुनाव, बोर्ड पेपर्स चेकिंग इत्यादि के लिए लगाई जाती है, किन्तु यह कुछ इस तरह से schedule किया जाता है कि बच्चों की पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़े.

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    • टेक्नोलॉजी का आभाव होना:

    सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज (Smart Classes) की सुविधा नहीं होती है.

    • पारंपरिक परीक्षा पैटर्न:

    सरकारी स्कूलों में साल में केवल 3 बार परीक्षा (पारंपरिक परीक्षा पैटर्न) कंडक्ट की जाती है.

    इन सब कारणों के बाद भी, JEE Main और JEE Advanced की परीक्षा को क्रैक करने वाले सरकारी स्कूल के बच्चों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है. आइये हम जानते हैं कि कैसे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे JEE Main और JEE Advanced की तैयारी मुफ्त में कर सकते हैं.

    • फ़ीस का बहुत ही कम होना:

    हम सभी जानते हैं कि सरकारी स्कूलों की फ़ीस निजी स्कूलों की तुलना में बहुत ही कम होती है. सरकारी स्कूलों में कक्षा 8वीं तक विद्यार्थियों को मुफ्त शिक्षा प्रदान की जाती है, जिससे गरीब बच्चों को भी शिक्षा मिल सके.

    • उच्च शिक्षित (Highly Qualified) टीचर होना:

    इसमें कोई संदेह नहीं कि सरकारी स्कूल के अध्यापकों के पास ज्ञान का भंडार होता है क्योंकि वो उच्च शिक्षित (Highly Qualified) होते हैं. ज़रूरत होती है तो बस उस ज्ञान को हासिल करने की ललक की क्योंकि हम जानते हैं कि हमेशा प्यासा ही कुएं के पास जाता है. विद्यार्थी अपने सारे doubts अध्यापकों की सहायता से क्लियर कर सकते हैं. ऐसा हो ही नहीं सकता कि आप अपने doubt पूछने किसी टीचर के पास जाओ और वो मना कर दे. अगर कोई भी टीचर ऐसा करता है तो आप अपने स्कूल के प्रिंसिपल से इसकी शिकायत कर सकते हैं.

    • अपने स्कूल के टीचर से कोचिंग नहीं लें:

    कभी-कभी विद्यार्थी अपने ही स्कूल के टीचर के पास कोचिंग लेने लगते हैं, जिससे विद्यार्थी अपनी स्कूल की कक्षा में ध्यान से नहीं पढ़ते. उन्हें लगता है कि टीचर द्वारा स्कूल की कक्षा में पढ़ाने वाला हर कांसेप्ट वो कोचिंग क्लास में आसानी पढ़ लेंगे, जिससे विद्यार्थी लापरवाह हो जाते हैं. अगर विद्यार्थी किसी और टीचर से कोचिंग लेंगे तो उन्हें 1 ही कांसेप्ट दो अध्यापकों से सीखने का मौका मिलेगा और वो किसी भी कांसेप्ट को आसानी से समझ लेंगे.

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