पेमेंट बैंक तथा स्माल बैंक की तैयारी कैसे करें?

Dec 6, 2017, 11:24 IST

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में देश में वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने की दिशा में भारत में पेमेंट बैंक और स्मॉल बैंक जैसे छोटे बैंकों को स्थापित करने को औपचारिक मंजूरी दी है। देश में लघु बैंकों (स्मॉल बैंक) के लिए 10 प्लेयर्स तथा भुगतान बैंकों (पेमेंट्स बैंक) के लिए 11 संस्थाओं को मंजूरी दी गयी है।

Discover new job options with Payment Banks and Small Banks
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भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में देश में वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने की दिशा में भारत में पेमेंट बैंक और स्मॉल बैंक जैसे छोटे बैंकों को स्थापित करने को औपचारिक मंजूरी दी है। देश में लघु बैंकों (स्मॉल बैंक) के लिए 10 प्लेयर्स तथा भुगतान बैंकों (पेमेंट्स बैंक) के लिए 11 संस्थाओं को मंजूरी दी गयी है। इन बैंकों को केवल जमा की स्वीकृति, डेबिट कार्ड जारी करने, प्रेषण आदि सेवाओं जैसी गतिविधियां और सेवाएं जारी करने की अनुमति दी गयी है। एक बात तय है कि बैंकिग सेक्टर इस समय कई प्रकार के परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और यह वह परिवर्तन है, जिसका देश भर में बैंकिग क्षेत्र में अपने कैरियर बनाने को उत्सुक लाखों उम्मीदवार स्वागत करेंगे। इन बैंकों का असर यह होगा कि पहले से ही संपन्न इस क्षेत्र में इनकी मौजूदगी से रोजगार की अधिक संभावनाएं उत्पन्न होंगी।

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स्मॉल और पेमेंट्स बैंक (लघु और भुगतान बैंक) : एक बेहतरीन अवसर

देश के शीर्ष निजी ऋणदाता बैंक, आईसीआईसीआई बैंक की प्रबंध निदेशक और सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) चंदा कोचर द्वारा दिए गए एक बयान के अनुसार, "नए बैंकों की दोनों श्रेणियां महत्वपूर्ण हैं जो भारत में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं क्योंकि भारत एक खुला बाजार है। यह मौजूदा बैंकिंग प्रणाली का पूरक है और इससे नए खिलाड़ियों के लिए पारस्परिक रूप से अपने हितों की अलग पहचान बनाने के लिए पर्याप्त अवसर होगें"।

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अगले दो से तीन साल के दौरान स्मॉल और पेमेंट्स बैंक जूनियर लेवल के साथ साथ मिड लेवल और सीनियर लेवल पर बड़ी संख्या में लोगों की नियुक्ति करेंगे तांकि वो बाजार में मौजूद अपने प्रतिद्वंदियों से व्यवसाय में मुकाबला कर सकें।

  • जूनियर स्तर (लेवल) के कर्मचारियों की आवश्यकता : विभिन्न बैंकों को अपने कार्य के लिए जूनियर लेवल पर कर्मचारियों की आवश्यकता होगी ताकि वे बाजार में पहले से ही मौजूद बिजनेस के साथ साथ उत्पाद प्रबंधन, बैंकिंग लेनदेन, ऑपरेशन आदि जैसे कारोबार का अधिग्रहण कर सकें। मुआवजा पैकेज को ध्यान में रखते हुए इस प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में अन्य खिलाड़ियों से कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है।
  • मिड लेवल (मध्य स्तर) के कर्मचारियों की आवश्यकता: यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां अनुभवी लोगों के लिए अपार संभावनाएं हैं। इन पदों पर अनुभवी लोगों की आवश्यकता होने के कारण देश के अन्य बैंकों में पहले से ही तैनात कर्मचारियों के लिए संभावनाओं के द्वार खुल जाएंगे। अच्छे और अनुभवी टेलेंट को आकर्षित करने के लिए इन पदों पर आकर्षक वेतन भी  मिलने जा रहा है।
  • वरिष्ठ स्तर (सीनियर लेवल) के कर्मचारियों की आवश्यकता : यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहां नए बैंकों को अधिक पैसा खर्च करना पडेगा ताकि वे बाजार में सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को आकर्षित कर सकें। इन लोगों को भी इस क्षेत्र में अन्य प्लेयर्स से सामना करना पड़ेगा और यदि संभव हुआ तो मुआवजे की पेशकश करनी होगी ताकि वर्तमान रुझान के अनुसार उद्योगों को ज्यादा से ज्यादा आकर्षित किया जा सके।
  • विभिन्न प्रकार की कार्य संस्कृति : जैसा कि इस आर्टिकल में बता चुकें हैं कि इस क्षेत्र में नई रिक्तियों की संभावना है इसलिए यह भी तय है कि इन बैंकों की कार्य संस्कृति मौजूदा बैंको की कार्य संस्कृति से बहुत अलग होगी क्योंकि ये बैंक बाजार में पहली बार कदम रखेंगे। इसलिए इस बात को समझने की जरूरत है कि सब कुछ पूर्व नियोजित नहीं होगा जैसा कि बाजार में पहले से ही मौजूद कुछ बड़े खिलाड़ियों के पास है।
  • गांवो पर जोर : चूंकि इन बैंकों का फोकस देश की बैंकिंग सुविधा रहित वह जनता है जो ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में रह रही हैं। इन बैंको में कार्य करने वाले कर्मचारियों को देश के दूरदराज वाले इलाकों में कार्य करना पड़ सकता है। अपने कैरियर का अधिकतर समय इन्हें इन ग्रामीण इलाकों में बिताने के लिए तैयार रहना होगा।
  • आपको सतर्क रहना होगा : एक वरिष्ठ अधिकारी या एक मिड लेवर एक्जक्यूटिव या एक फ्रेशर होने के नाते आपको यह जरूर सोचना चाहिए कि यदि आप एक नये बैंक में जाने की सोच रहे हैं तो पहले उनकी कार्य प्रणाली के बारे में अच्छी तरह से पता कर लें क्योंकि इन बैंकों में भविष्य के बारे में अनिश्चता है।

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यह सच है कि अगर बाजार में नई संस्थाए आएंगी तो रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे लेकिन सबसे पहले इन नए बैंकों की कार्यप्रणाली और पेशवर तरीकों को समझना बहुत जरूरी है विशेषकर उन लोगों को जो अनुभवी हैं। हम पहले से ही भारत में स्टार्ट-अप कल्चर का नकारात्मक पहलू देख चुके हैं और कोई भी नहीं जानता कि इन बैंकों का आगे का भविष्य कैसा होगा और वो भी तब जब एसबीआई जैसे दिग्गज बैंक पहले से इस व्यापार क्षेत्र में धाक जमा चुके हैं। गौरतलब है कि इन बैंकों के आने से देश में पहले से ही मौजूद प्रतिस्पर्धी बैंकिंग क्षेत्र में नए अवसरों और नई चुनौतियों के रास्ते खुले हैं। यह आप पर निर्भर करता है कि आप कितनी दूर तक इन चुनौतियों को स्वीकार करते हैं और रंग-बिरंगी उड़ान भरने के लिए तैयार हैं।

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