देश भर के विश्वविद्यालयों तथा कॉलेजों के अध्यापकों के व्यापक विरोधों के बावजूद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 10 जून 2013 को शैक्षिक कार्यक्षमता सूचकों (Academic Performance Indicators – APIs) पर आधारित ‘कार्यक्षमता आधारित मूल्यांकन प्रणाली’ (Performance Based Appraisal Systems – PBAS) को जारी रखने का निर्णय लिया. इस प्रणाली को अध्यापकों के उपयोगी अनुसंधानों के मूल्यांकन के लिए भी उपयोग किया जाता है.
हालांकि यूजीसी ने स्पष्ट किया कि एपीआई स्कोर को अतिम चयन का आधार नही बल्कि स्क्रीनिंग के लिए अपनाया जाना है. किसी भी चयन में साक्षात्कार के अंतिम चरण के स्कोर को विश्वविद्यालय के बोर्ड द्वारा गिना जाएगा.
यूजीसी ने मई 2010 में यूजीसी अधिनियम 2010 में सुधारों (विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में अध्यापकों, अन्य शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता और उच्च शिक्षा के स्तर को बनाये रखने के लिए) को एपीआई सूचकों में बदलाव से साथ अनुमोदित किया था.
इस अधिनियम के अनुसार अध्यापकों का उनके कार्य-निष्पादन के आधार पर वार्षिक श्रेणीकरण तथा मूल्यांकन किया जाना है तथा पीबीएएस के अनुसार पदोन्नति होनी है जो कि एपीआई पर आधारित है. अध्यापकों के विभिन्न संगठनों तथा विश्वविद्यालयों ने इसका विरोध कर रहे हैं.
अनुसंधानों के स्तर तथा उनकी गुणवत्ता पर भी चिता जाहिर की गयी क्योंकि एपीआई स्कोर को बेहतर के उद्देश्य से अध्यापक सरल कार्यों जैसे सम्मेलनो आदि में भाग लेने को ज्याद वरीयता देंगे जबकि कठिन कार्यों जैसे अनुंसधान परियोजनाओं तथा पेपर आदि को कम महत्व देंगे. अनुसंधान के प्रत्येक हिस्से में उम्मीदवार के योगदान को सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने अधिनियम को इस प्रकार संशोधित किया कि प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों, सम्मेलनों एवं गोष्ठियों से सम्बन्धित 15 फीसदी से अधिक एपीआई स्कोर नहीं गिना जा सकता.
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