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मेडिकल में करियर

Sep 6, 2018 14:19 IST
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मेडिसिन में एमबीबीएस क्या है?

मेडिकल साइंस के क्षेत्र में एमबीबीएस अंडरग्रेजुएट डिग्री या फर्स्ट प्रोफेशनल डिग्री है. एमबीबीएस कोर्सेज का लक्ष्य छात्रों को मेडिसिन की फील्ड में ट्रेंड करना है. एमबीबीएस पूरी होने पर, कोई व्यक्ति पेशेंट्स के रोगों को डायग्नोस करने के बाद उन्हें मेडिसिन्स प्रिस्क्राइब करने के योग्य बन जाता है. एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त करने के बाद व्यक्ति अपने नाम के आगे ‘डॉक्टर’ शब्द जोड़ सकता/ सकती है.

एक मेडिसिन डॉक्टर क्या करता है?

एमबीबीएस करने के इच्छुक छात्र, जिन्हें मेडिसिन की फील्ड में महारत हासिल होती है, फिजिशियन्स के तौर पर जाने जाते हैं. फिजिशियन्स का काम रोग के कारण का पता लगाना है. इसके बाद, वे रोगी को ट्रीटमेंट कोर्स या उपयुक्त मेडिसिन प्रिस्क्राइब करते हैं. वे क्लिनिकल टेस्ट्स के रिजल्ट्स की जांच करने में एक्सपर्ट होते हैं.

मेडिसिन की फील्ड में डॉक्टर बनने के लिए, किसी भी व्यक्ति के लिए यह बहुत जरुरी है कि वह अन्य लोगों की भावनाओं को हैंडल करने और मैनेज करने के लिए जिम्मेदार रवैया अवश्य अपनाए. उनका आईक्यू और ईक्यू हाई होता है. डॉक्टर्स के लिए यह जरुरी है कि वे पेशेंट्स का इलाज करते समय पोलाइट रहें और धीरज रखें.

मेडिसिन में कोर्सेज और उन कोर्सेज की अवधि

आमतौर पर स्टूडेंट्स 10+2 क्लास पास करने के बाद कोर मेडिकल कोर्सेज में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं. यहां उन कोर्सेज की लिस्ट दी जा रही है जो मेडिकल डिग्री प्राप्त करने के लिए स्टूडेंट्स चुन सकते हैं ताकि उनके शानदार करियर का निर्माण हो सके:  

अंडरग्रेजुएट कोर्सेज

मेडिसिन में अंडरग्रेजुएट कोर्स पूरा करने के बाद, मेडिकल डिग्री प्राप्त करने के इच्छुक छात्र को ‘एमबीबीएस डॉक्टर’ का शानदार टाइटल मिल जाता है. एमबीबीएस बैचलर ऑफ़ मेडिसिन का संक्षिप्त रूप है. एमबीबीएस कोर्स की अवधि 5 वर्ष की होती है जिसमें डिग्री प्रोग्राम पूरा करने के लिए 6 माह की ट्रेनिंग भी शामिल है.

पोस्टग्रेजुएट कोर्सेज

मेडिसिन की फील्ड में पोस्ट ग्रेजुएशन को एमडी (डॉक्टर ऑफ़ मेडिसिन) के तौर पर जाना जाता है. यह मेडिसिन की फील्ड में सुपर-स्पेशलाइजेशन है और इस कोर्स की अवधि 3 वर्ष की है.

डॉक्टोरल कोर्सेज

एमडी की डिग्री प्राप्त करने के बाद, डीएम बनने के लिए छात्र हायर स्टडीज जारी रख सकते हैं. डीएम की डिग्री पीएचडी की डिग्री के समकक्ष है. डॉक्टोरल कोर्स की अवधि 3-4 वर्ष की है. यह अवधि यूनिवर्सिटी गाइडलाइन्स के अनुसार थीसिस पूरी करने के लिए लगने वाले समय पर भी निर्भर करती है.

मेडिकल कॉलेजेस में एडमिशन कैसे लें?

किसी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन प्राप्त करने के लिए पक्के इरादे और कड़ी मेहनत की जरूरत होती है. इस प्रोफेशन के लिए आपमें न केवल प्रोफेशनल कमिटमेंट ही होनी चाहिए बल्कि, किसी रोगी का जीवन बचाने का जज्बा भी होना चाहिए. इसलिये, यह डिग्री प्राप्त करने के लिए आपको एडमिशन प्रोसेस को पूरी तरह फ़ॉलो करना चाहिए. अब हम मेडिकल कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए आवश्यक एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया और एंट्रेंस एग्जाम्स की चर्चा करते हैं. 

एलिजिबिलिटी

अंडरग्रेजुएट कोर्स

इस अंडरग्रेजुएट कोर्स को एमबीबीएस (बैचलर ऑफ़ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ़ सर्जरी) के नाम से जाना जाता है. 10+2 क्लास में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी पढ़ने वाले छात्र, जिन्हें 12 वीं क्लास में कम से कम 55% मार्क्स प्राप्त हुए हैं, एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन लेने के लिए एंट्रेंस एग्जाम देने के लिए अप्लाई कर सकते हैं.

पोस्टग्रेजुएट कोर्स

एमडी (डॉक्टर ऑफ़ मेडिसिन) की डिग्री प्राप्त करने के लिए, छात्र के पास एमबीबीएस की डिग्री और इंटर्नशिप का अनुभव अवश्य होना चाहिए.

डॉक्टोरल कोर्स

डीएम: यह एक डॉक्टरेट डिग्री है जो यूएस की कई यूनिवर्सिटीज सफल छात्रों को प्रदान करती हैं. यह डिग्री पीएचडी के समकक्ष डिग्री है. जिन डॉक्टर्स के पास एमडी की डिग्री होती है, वे यह कोर्स कर सकते हैं.

एंट्रेंस एग्जाम्स

अंडरग्रेजुएट एग्जाम्स

• एमबीबीए

• एआईपीएमटी (ऑल इंडिया प्री-मेडिकल/ प्री-डेंटल टेस्ट)

• एम्स (ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंट्रेंस टेस्ट)

• जेआईपीएमईआर (जवाहर लाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च) मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट

• क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज एंट्रेंस एग्जाम

• बनारस हिंदू विश्वविद्यालय प्री-मेडिकल टेस्ट (बीएचयू-पीएमटी)

• अंडरग्रेजुएट स्टडीज के लिए मणिपाल विश्वविद्यालय एडमिशन टेस्ट  

पोस्टग्रेजुएट एग्जाम्स

• एआईपीजीईई (ऑल इंडिया पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम)

• डीयूपीजीएमटी (दिल्ली यूनिवर्सिटी पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम)

डॉक्टोरल कोर्स एग्जाम

• एनईईटी - एसएस

• जेआईपीएमईआर डीएम

मेडिसिन कोर्स की विभिन्न स्ट्रीम्स

मेडिसिन में स्पेशलाइजेशन करने वाले छात्र, 5 वर्ष के इस कोर्स के दौरान, विभिन्न फ़ील्ड्स के बारे में नॉलेज प्राप्त करते हैं. कुछ स्पेशलाइजेशन्स के बारे में जानकारी निम्नलिखित है:

ह्यूमन एनाटोमी

यह मेडिसिन के तहत पढ़ाया जाने वाला एक बेसिक सब्जेक्ट है. यह एनाटोमी विषय से संबंधित है जिसके तहत मानव शरीर की मैक्रोस्कोपिक और माइक्रोस्कोपिक एनाटोमी शामिल है.

बायोकेमिस्ट्री

मेडिसिन की यह ब्रांच मानव शरीर के अंदर होने वाली केमिकल प्रोसेस से संबद्ध है. इसके साथ ही यह मानव अंगों पर केमिकल प्रोसेसेस के प्रभाव को समझने पर फोकस करती है.

ऑर्थोपेडिक्स

यह स्पेशलाइजेशन आपके शरीर के हाड-पिंजर या मस्क्यूलोस्केलेटल सिस्टम की बीमारियों और जख्मों से संबंधित है. एमबीबीएस करने वाले छात्र बाद में इस विषय में एमडी भी कर सकते हैं.

रेडियोथेरेपी

इस विषय का फोकस एरिया एक्स-रेज़, गामा रेज़, इलेक्ट्रान बीम्स या प्रोटोन्स के बारे में जानकारी देना है ताकि मानव शरीर में कैंसर सेल्स जैसे विकारों को कम या समाप्त किया जा सके.

ऑपथैल्मोलॉजी

इस सब्जेक्ट में आप आंख की रचना और उसके काम करने के तरीकों के बारे में पढ़ते हैं. इस विषय में आंखों की विभिन्न बीमारियों और उनके इलाज के बारे में भी काफी जानकारी दी जाती है.

अनेस्थेसियोलॉजी

अनेस्थेसियोलॉजी विषय में आपको चेतना के साथ या चेतना के बिना अर्थात होश में या बेहोश करके, पूरे शरीर या शरीर के किसी अंग में दर्द महसूस होने या न होने के बारे में जानकारी दी जाती है ताकि पेशेंट्स के मेजर/ माइनर ऑपरेशन्स किये जा सकें. इसलिए, इस विषय को आपको बड़े ध्यान से पढ़ना होगा.

ह्यूमन फिजियोलॉजी

ह्यूमन फिजियोलॉजी विषय मनुष्यों पर मैकेनिकल, फिजिकल, बायोइलेक्ट्रिकल या बायोकेमिकल फंक्शन्स के प्रभाव के बारे में जानकारी देता है. 

मेडिसिन ग्रेजुएट्स को अन्य कई विषय पढ़ाए जाते हैं. एमडी जैसी हायर स्टडीज में छात्र इनमें से किसी एक विषय में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं.

एमबीबीएस (मेडिसिन) डिग्री का स्कोप

चाहे वह कोई प्राइवेट या गवर्नमेंट सेक्टर हो, किसी भी एमबीबीएस डॉक्टर का विशेष महत्व होता है. बहुत बढ़िया सैलरी पैकेज मिलने के साथ ही डॉक्टर्स को अपने स्किल्स की वजह से सम्मान और विशेष पहचान मिलती है. भारत में निरंतर विकास हो रहा है और हेल्थ केयर फैसिलिटीज की तरफ खास ध्यान दिया जा रहा है. देश भर में हेलिकॉप्टर्स के जरिये दी जाने वाली ‘एयर डिस्पेंसरी’ जैसी सर्विसेज, गांव के लोगों की हेल्थ में सुधार लाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर टीकाकरण प्रोग्राम्स, नेशनल न्यूट्रीशन मिशन (एनएनएम) और अन्य कई विकास कार्यों ने ऐसे डॉक्टर्स का महत्व काफी बढ़ा दिया है जो हॉस्पिटल की चारदीवारी से बाहर निकलकर काम करना चाहते हैं.

इसलिये यहां उन इंडस्ट्रीज और फ़ील्ड्स की लिस्ट पेश है जिसमें कोई मेडिसिन डॉक्टर अपनी रूचि के अनुसार काम कर सकता/ सकती है.

हॉस्पिटल्स

ये वे स्थान होते हैं जहां पर सभी बीमार लोग अपने रोगों और तकलीफों का इलाज करवाने के लिए डॉक्टर्स के पास आते हैं.

फार्मास्यूटिकल और मेडिकल कंपनीज

रिसर्चर्स और विशेष रूप से मेडिसिन डॉक्टर्स मेडिकल कंपनियों में आपना शानदार करियर बना सकते हैं. आजकल सिप्ला, रन्बेक्सी, ग्लेक्सो स्मिथ क्लिन जैसी मशहूर और अन्य कई कंपनियां बीमारियों को रोकने या बीमारियों से बचने के लिए मेडिसिन इन्वेंट करने के लिए लाखों डॉलर्स इंवेस्ट करती हैं.

मेडिकल कॉलेजेस

मेडिसिन डॉक्टर्स टीचिंग में भी अपना करियर बना सकते हैं. इससे उन्हें उभरते हुए डॉक्टर्स के साथ अपने ज्ञान को साझा करने के काफी अच्छे अवसर मिलते हैं.

बायोटेक्नोलॉजी कंपनीज 

बायोटेक्नोलॉजी आजकल का खास ट्रेंड है जिसके तहत मेडिसिन डॉक्टर्स की मांग काफी बढ़ती जा रही है. किसी भी एक्सपेरिमेंट के सही फ़ॉर्मूले का पता लगाने के लिए और रिसर्च कार्यों में सफलता प्राप्त करने के लिए मेडिसिन डॉक्टर्स का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है. 

प्राइवेट प्रैक्टिस

मेडिसिन की फील्ड में कई वर्षों के अनुभव के बाद, कोई डॉक्टर अपना प्राइवेट क्लिनिक भी खोल सकता/ सकती है. आमतौर पर सही इलाज मिलने पर लोग अपना डॉक्टर बदलना पसंद नहीं करते हैं और लगातार एक ही डॉक्टर के पास जाते हैं. इसलिये, अच्छे डॉक्टर्स के क्लिनिक में पेशेंट्स की काफी भीड़ लगी रहती है.

मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए करियर प्रॉस्पेक्ट्स

मेडिकल डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए मेडिकल प्रोफेशन काफी अच्छी करियर ग्रोथ ऑफर करता है. हेल्थकेयर प्रैक्टिशनर्स के लिए मेडिकल फील्ड में रोज़गार के काफी अवसर मौजूद होते हैं. अब हम विभिन्न जॉब प्रोफाइल्स और उनसे संबद्ध सैलरी पैकेजेज की चर्चा करते हैं:

जॉब प्रोफाइल्स

• जूनियर डॉक्टर

• डॉक्टर्स

• फिजिशियन

• जूनियर सर्जन्स

• मेडिकल प्रोफेसर या लेक्चरर

• रिसर्चर

• साइंटिस्ट

सैलरी प्रॉस्पेक्ट्स

किसी एमबीबीएस डॉक्टर को अपने करियर की शुरुआत में लगभग 3-4 लाख सैलरी मिलती है. जैसे-जैसे उनका अनुभव और नॉलेज बढ़ते जाते हैं, डॉक्टर्स की सैलरी भी बढ़ती जाती है. कुछ वर्षों के अनुभव के बाद डॉक्टर्स को काफी बढ़िया सैलरी पैकेज मिलते हैं.

भारत में टॉप मेडिकल कॉलेजेज

हेल्थकेयर हमारी अर्थव्यवस्था की समृद्धि और विकास के लिए लाइफलाइन बन चुका है. इस विकास को जारी रखने के लिए, मेडिसिन की फील्ड में आने वाली चुनौतियों का सामना करने और उनका समाधान तलाशने के लिए तत्पर अति कुशल डॉक्टर्स को तैयार करने में मेडिकल कॉलेज/ इंस्टिट्यूट्स बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

यहां टॉप 10 मेडिकल कॉलेजेज की लिस्ट दी जा रही है जहां से आप मेडिसिन में अपने रूचि के अनुसार कोई स्पेशलाइजेशन कोर्स कर सकते हैं. यह लिस्ट एनआईआरएफ रैंकिंग से तैयार की गई है जिसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) द्वारा जारी किया गया है और यह लिस्ट भारत के कॉलेजों के लिए एक विशेष मानक के तौर पर मानी जाती है.

क्रम संख्या

इंस्टिट्यूट

लोकेशन

1

ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज, नई दिल्ली

नई दिल्ली

2

पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च

चंडीगढ़

3

क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज

वेल्लोर, तमिलनाडु

4

कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज

मनिपाल, कर्नाटक

5

किंग जॉर्ज’स मेडिकल यूनिवर्सिटी

लखनऊ, उत्तर प्रदेश

6

जवाहरलाल  इंस्टिट्यूट ऑफ़ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च

पुडूचेरी

7

बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी

उत्तर प्रदेश

8

इंस्टिट्यूट ऑफ़ लीवर एंड बिलियरी साइंसेज

नई दिल्ली

9

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश

10

श्री रामचंद्र मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट

चेन्नई

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