भारत-रूस रणनीतिक सहयोग के अंतर्गत रूस के राष्ट्रपति दमित्रि मेदवेदेव 21 दिसंबर, 2011 को दो दिनों के 10वें भारत-रूस शिखर बैठक के लिए भारत आए. इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के मध्य संयुक्त घोषणा पत्र जारी करने के साथ ही 30 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए.
महत्वपूर्ण समझौते
भारत और रूस ने परमाणु, अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में दीर्घगामी लाभ के कुल 11 समझौते किए. दोनों देशों के सरकारी विभागों और प्राइवेट सेक्टर के बीच 19 अन्य समझौते भी हुए. दोनों देशों के मध्य किए गए समझौतों के अनुसार दोनों देश चुनावी प्रक्रिया में एक-दूसरे का सहयोग करने पर राज़ी हो गए हैं. इमरजेंसी हालात में भी दोनों देश एक-दूसरे साथ देने पर सहमत हो गए हैं. वीजा फ्री ट्रांजिट यानि दोनों देशों के नागरिकों के आने-जाने की प्रक्रिया को भी आसान बनाने पर सहमति हो गई है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बढ़ाने में भी रूस भारत की मदद करेगा. भारत और रूस ने तमिलनाडु के कुदनकुलम में अतिरिक्त न्यूक्लियर रिएक्टर स्थापित करने पर भी बातचीत की. इसके साथ ही पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान (एफजीएफए) के लिए हुए प्राथमिक डिजाइन करार के तहत लड़ाकू विमान का संयुक्त रूप से डिजाइन और विकास शामिल है.
ग्लोनास पर संधि
भारत और रूस के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र सहयोग समझौते के तहत ग्लोनास उपग्रहों के अत्यंत सूक्ष्म सिग्नल की सुविधा भारत को देने पर भी सहमति बनी. अब ग्लोनास के सिग्नल का लाभ भारत की सेनाएं उठा सकेंगी. ग्लोनास के तहत पृथ्वी की कक्षा में 24 उपग्रहों का एक नेटवर्क स्थापित होना है. अब तक 20 उपग्रह सक्रिय हो चुके हैं, जिनसे दो साल पहले किए गए समझौतों के कारण भारत ने पहले ही लाभ उठाना शुरू किया था, लेकिन अब तक सैन्य मामलों के लिए इसका इस्तेमाल संभव नहीं था. ग्लोनास ग्लोबल नैविगेशन सैटलाइट सिस्टम है. इसे अमेरिकी जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) का विकल्प माना जाता है. ग्लोनास को मिलिट्री और सिविल दोनों तरह के इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है. ग्लोनास और जीपीएस से यूजर अपनी लोकेशन की काफी सटीक जानकारी (महज कुछ मीटर के अंदर तक) ले सकता है.
5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान
दोनों देशों के बीच पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान (एफजीएफए) के प्राथमिक डिजाइन समझौते के तहत लड़ाकू विमान की संयुक्त रूप से डिजाइन तैयार करना और उनका विकास करना शामिल है. इस परियोजना को भारत के हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और रूस के सुखोई डिजाइन ब्यूरो व रोसोबोरोनेक्सपोर्ट द्वारा संयुक्त रूप से आगे बढ़ाया जाएगा. 30 टन वजन वाले इस विमान के पास दक्षता और मारक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत ही उन्नत तकनीक होगी. यह विमान हवा से हवा में, हवा से जमीन पर और हवा से पोत पर मिसाइलें दागने में सक्षम होगा. उल्लेखनीय है कि एक एफजीएफए के निर्माण पर कम से कम 10 करोड़ डॉलर की लागत आएगी और वायु सेना 2017-18 से इस तरह के कोई 300 विमानों को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना में है. यह कुल 30 अरब डॉलर का सौदा होगा. भारत की अब तक की यह सबसे बड़ी रक्षा परियोजना होगी.
मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत
भारत एवं रूस आर्थिक संबंधों को नयी उंचाई देने की प्रतिबद्धता जताते हुए इसके लिए व्यापक आर्थिक समझौते पर विचार-विमर्श करने पर सहमत हुए. ऐसा करते हुए रूस, कजाखस्तान तथा बेलारूस के बीच स्थापित कस्टम्स यूनियन समझौतों के कार्यान्वयन को भी ध्यान में रखा जाएगा. इसके साथ ही दोनों पक्षों ने आपसी व्यापार को 2015 तक बढ़ा कर वार्षिक 20 अरब डालर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा.
दोनों देशों ने निजी क्षेत्रों में साझा निवेश की संभावना को स्वीकार किया और द्विपक्षीय उर्जा सहयोग को अपने रणनीतिक गठजोड के लिए प्रमुख तत्व माना. उल्लेखनीय है कि भारत एवं रूस का द्विपक्षीय व्यापार 2009-10 में 4.54 अरब डालर था.
संयुक्त घोषणा पत्र के प्रमुख बिंदु
दोनों देशों के बीच हुई बातचीत के बाद जारी संयुक्त घोषणा पत्र में रूस ने भारत के न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप(एनएसजी) में प्रवेश का समर्थन किया. रूस ने संयुक्त राष्ट्र की स्थायी परिषद द्वारा पारित प्रस्ताव जिसमें पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन, जिनमें जमात-उद-दावा और उसके प्रमुख हफीज सईद पर पाबंदी की बात कही गई है, को भी जल्दी लागू करने की बात कही. रूस ने भारत को मिसाइल टेक्नॉलॉजी कंट्रोल रिजिम (एमटीसीआर) की सदस्यता के लिए भी समर्थन दिया. दोनों देशों ने कहा कि ईरान को परमाणु शक्ति के शांतिपूर्ण इस्तेमाल का अधिकार है. ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम को लेकर चल रहे विवाद को बातचीत के जरिए ही सुलझाने का प्रयास किया जाना चाहिए. दोनों देश अफगानिस्तान में आपसी सहयोग और बढ़ाने पर भी राजी हुए.
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