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केंद्र सरकार ने ECLGS की शुरुआत कर तीन लाख करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त फंडिंग को मंज़ूरी दी

इस योजना के तहत, राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड द्वारा योग्य लघु, कुटीर एवं मध्यम उपक्रम (MSME) और इच्छुक कर्जदारों को गारंटी युक्त आपातकालीन क्रेडिट लाइन सुविधा के रूप में तीन लाख रुपये तक की अतिरिक्त फंडिंग के लिए 100 प्रतिशत गारंटी कवरेज उपलब्ध कराई जाएगी.

May 21, 2020 12:18 IST
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केंद्र सरकार ने आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) की शुरुआत कर तीन लाख करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त फंडिंग को मंज़ूरी दे दी है. इस योजना के तहत सदस्य ऋण संस्थानों को नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) की ओर से 100 प्रतिशत क्रेडिट गारंटी कवरेज दिया जाएगा.

इस योजना के तहत, राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड द्वारा योग्य लघु, कुटीर एवं मध्यम उपक्रम (MSME) और इच्छुक कर्जदारों को गारंटी युक्त आपातकालीन क्रेडिट लाइन सुविधा के रूप में तीन लाख रुपये तक की अतिरिक्त फंडिंग के लिए 100 प्रतिशत गारंटी कवरेज उपलब्ध कराई जाएगी.

उद्देश्य

भारत सरकार द्वारा मौजूदा और अगले तीन वित्तीय वर्षों के लिए 41,600 करोड़ रुपए उपलब्ध कराएगी. कैबिनेट ने ये भी मंज़ूरी दी है कि गारंटी युक्त आपातकालीन क्रेडिट लाइन (GECL) सुविधा के तहत इस योजना की घोषणा की तारीख से लेकर 31 अक्टूबर 2020 की अवधि में स्वीकृत सभी कर्जों या जीईसीएल के तहत 3,00,000 करोड़ रुपये तक की कर्ज राशि की स्वीकृति, इनमें से जो पहले हो, पर लागू होगी.

मुख्य बिंदु

• आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) को कोविड-19 और इसके बाद लॉकडाउन की वजह से बनी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के एक निर्दिष्ट उपाय के रुप में बनाया गया है. इससे एमएसएमई सेक्टर में विनिर्माण और अन्य गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.

• इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक परेशानी झेल रही एमएसएमई को पूरी गारंटी युक्त आपातकालीन क्रेडिट लाइन के रुप में तीन लाख करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त फंडिंग उपलब्ध कराते हुए उन्हें राहत दिलाना है.

• इस योजना का मुख्य उद्देश्य सदस्य ऋणदात्री संस्थाओं यानी बैंकों, वित्तीय संस्थानों (एफआई), और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (एनबीएफसी) को कोविड-19 संकट की वजह से आर्थिक तंगी झेल रहे एमएसएमई कर्जदारों को देने के लिए उनके पास अतिरिक्त फंडिंग सुविधा की उपलब्धता बढ़ाना है.

विशेषताएं

• इस योजना के तहत जीईसीएल फंडिंग के लिए वे सभी एमएसएमई योग्य होंगे जिनका बकाया ऋण 29 फ़रवरी 2020 को 25 करोड़ रुपये तक जो इस तारीख तक पिछले 60 दिनों तक या उससे कम दिनों तक बकाया यानी नियमित एसएमए 0 और एसएमए 1 खातों या जिनका एक करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार हो.

• योग्य एमएसएमई कर्जदारों को जीईसीएल फंडिंग की राशि या तो अतिरिक्त सक्रिय पूंजी मियादी ऋण (बैंकों और वित्तीय संस्थानों के मामले में) या मियादी ऋण (एनबीएफसी के मामले में) के रुप में उनके 29 फरवरी 2020 को 25 करोड़ रुपये तक की कुल बकाया राशि का 20 फीसदी ही होगी.

• ईसीएलजीएस के तहत जीईसीएल के जरिए की जाने वाली पूरी फंडिंग एनसीजीटीसी द्वारा सदस्य ऋणदात्री संस्थाओं को 100 प्रतिशत क्रेडिट गारंटी के साथ होगी।

• इस योजना के तहत ऋण की अवधि चार साल होगी और इसकी अधिस्थगन अवधि मूलधन पर एक साल होगी. योजना के तहत एनसीजीटीसी द्वारा सदस्य ऋणदाता संस्थानों से कोई भी गारंटी राशि नहीं ली जाएगी.

• योजना के तहत ब्याज दर बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के लिए अधिकतम 9.25 फीसदी और गैर- वित्तीय संस्थाओं के लिए अधिकतम 14 प्रतिशत होगी.

योजना का प्रभाव

योजना को कोविड-19 और इसके बाद लॉकडाउन की वजह से बनी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के एक निर्दिष्ट उपाय के रुप में बनाया गया है. इससे एमएसएमई सेक्टर में विनिर्माण और अन्य गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन में एमएसएमई की अहम भूमिका को देखते हुए, प्रस्तावित योजना से एमएसएमई सेक्टर को सदस्य ऋणदाता संस्थानों के जरिए कम ब्याज दर पर तीन लाख करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त ऋण मुहैया कराने से काफी राहत मिलेगी और इस तरह एमएसएमई को अपनी संचालन उत्तरदायित्वों को पूरा करने और व्यापार को फिर से शुरू करने में मदद मिलेगी.

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