केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2017-18 के दौरान आवश्यकतानुसार 9020 करोड़ रूपये तक के अतिरिक्त बजटीय संसाधन जुटाने की मंजूरी दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की हुई बैठक में यह फैसला हुआ. यह राशि नाबार्ड द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के तहत चल रही प्राथमिकता वाली 99 सिंचाई परियोजनाओं और इसके साथ-साथ उनके कमांड क्षेत्र विकास (सीएडी) के त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (एआईबीपी) कार्यों के कार्यान्वयन हेतु ऋण के संदर्भ में 6 प्रतिशत प्रतिवर्ष की ब्यााज दर सुनिश्चित करने के लिए बॉन्डा जारी करके जुटाई जायेगी.
वर्ष 2016-17 के दौरान पीएमकेएसवाई (एआईबीपी और सीएडी) के अधीन चल रही 99 परियोजनाओं की दिसम्बर 2019 तक कई चरणों में पूरी करने के लिए पहचान की गई थी. त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रमों (एआईबीपी) के तहत अनेक प्रमुख और मध्यम सिंचाई परियोजनाएं मुख्य रूप से निधियों के अपर्याप्त प्रावधान के कारण अधूरी पड़ी थी. बड़ी मात्रा में निधि की आवश्यकता को पूरा करने और इन परियोजनाओं का कार्य पूरा करने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण 2016-17 के दौरान पीएमकेएसवाई-एआईबीपी और सीएडी के तहत पहचान की गई, मौजूदा परियोजनाओं के लिए केन्द्र और राज्यों के हिस्से के वित्तपोषण के लिए 20 हजार करोड़ रूपये की आरंभिक निधि के साथ नाबार्ड में समर्पित दीर्घकालीन सिंचाई निधि (एलटीआईएफ) के सृजन की घोषणा की थी.
राज्यों के लिए नाबार्ड से ऋण को आकर्षक बनाने के लिए वर्ष 2016-17 से 2019-20 के दौरान नाबार्ड को प्रतिवर्ष अपेक्षित लागत मुक्त निधियां उपलब्ध कराकर ब्याज की दर 6 प्रतिशत के आस-पास बनाये रखने का निर्णय लिया गया था.
वर्ष 2016-17 के दौरान नाबार्ड ने एलटीआईएफ के तहत कुल 9086.02 करोड़ रूपये की राशि वितरित की, इसमें से 2414.16 करोड़ रूपये पोलावरम परियोजना (ईबीआर घटक के बिना) के लिए जारी किये गये और बाकी 6671.86 करोड़ रूपये पहचान की गई ईबीआर उपयोग वाली परियोजनाओं के लिए जारी किये गये थे. इसके अतिरिक्त 924.9 करोड़ रूपये बजटीय प्रावधान के माध्यम से केन्द्रीय सहायता (सीए) के रूप में वितरित किये गये. वर्ष 2017-18 के दौरान एलटीआईएफ के माध्यम से 29 हजार करोड़ रूपये की अनुमानित राशि की जरूरत होगी, जिसके लिए 9020 करोड़ रूपये की ईबीआर अपेक्षित होगी.
राज्यों और केन्द्रीय जल आयोग द्वारा विभिन्न समीक्षा बैठकों के दौरान बतायी गयी स्थिति के अनुसार 18 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं या लगभग पूरी होने वाली हैं. इन सभी 99 परियोजनाओं से 2016-17 के दौरान 14 लाख हेक्टेयर से अधिक सिंचाई संभावना उपयोग की उम्मीाद है. यह भी महत्वरपूर्ण है कि परियोजनाओं के पूरा होने पर लगभग 76 लाख हेक्टेयर सिंचाई संभावना का उपयोग इस क्षेत्र में कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदल देगा जिसके परिणाम स्वरूप फसलों की सघनता, फसल प्रणाली में परिर्वतन, कृषि प्रसंस्करण और अन्य सहायक गतिविधियों के माध्यम से बड़ी संख्याष में रोजगार के अवसरों का सृजन होगा. पहचान की गई सिंचाई परियोजनाओं के पूरा होने और निर्माण चरण के दौरान बड़ी तादाद में वेतन वाले और अन्यं रोजगार अवसरों का सृजन होगा.
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