चीन ने 16 अक्टूबर 2018 को विश्व के सबसे बड़े मानवरहित परिवहन ड्रोन का सफल परीक्षण किया. चीन के आधिकारिक मीडिया ने 17 अक्टूबर 2018 को इसकी जानकारी दी. यह परिवहन ड्रोन डेढ़ टन तक भार ढो सकता है.
सरकारी समाचार पत्र ‘चाइना डेली’ की एक रिपोर्ट के अनुसार परिवहन ड्रोन फीहोंग-98 का विकास ‘चाइना एकेडमी आफ एयरोस्पेस इलेक्ट्रोनिक्स टेक्नोलोजी’ ने किया है.
मुख्य तथ्य:
रिपोर्ट के अनुसार यह ड्रोन 4500 मीटर तक की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है.
इस ड्रोन की गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा है.
इसकी उड़ान की अधिकतम सीमा 1200 किलोमीटर है.
अत्याधुनिक तकनीक से लैस यह ड्रोन सामान्य रूप से उड़ान भर सकता है और इसकी लागत भी किफायती है.
चीन मानवरहित विमानों के विकास में आगे रहा है.
ड्रोन: |
ड्रोन यह आधुनिक युग का एक नवीन प्रकार का विमान है, इसमे चालाक नही होता, इसके स्थान पर इसे सुदूर स्थान से नियंत्रित किया जाता है, इसका प्रयोग जासूसी करने, बिना आवाज किए मिसाइल हमला करने हेतु किया जाता है. |
अन्य जानकारी
चीन ने सुपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया
चीन की एक खनन कंपनी ने हाल ही में एक सुपरसोनिक मिसाइल के सफल परीक्षण का दावा किया है. इसे भारत-रूस के संयुक्त मिसाइल ब्रह्मोस के संभावित प्रतिद्वंद्वी के तौर पर देखा जा रहा है. इस मिसाइल को युद्धक विमानों और युद्धपोतों में तैनात किया जा सकता है। इस मिसाइल में चीनी कंपनी ने 18.8 करोड़ डॉलर का निवेश किया है.
गोल्बल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि पाकिस्तान अब चीन की इस नई मिसाइल को खरीद सकता है. इस मिसाइल में लांच, कमांड, कंट्रोल, लक्ष्य को भेदने के संकेत और समग्र सपोर्ट सिस्टम भी है. यह हल्की मिसाइल अधिक तेजी से अधिक दूर तक जा सकती है. चीन के सैन्य विश्लेषक का दावा है कि सुपरसोनिक मिसाइल न केवल भारत और रूस की ओर से बनाई गई ब्रह्मोस से सस्ती है बल्कि उससे ज्यादा उपयोगी है.
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