केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 06 जनवरी 2021 को भारत और जापान के बीच ‘निर्दिष्ट कुशल कामगारों' की सहभागिता से जुड़े समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की मंजूरी प्रदान कर दी. सरकारी बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई.
यह समझौता ज्ञापन निर्धारित कुशल कामगारों के संबंध में तय व्यवस्था के उचित परिचालन के लिए सहभागिता का मूलभूत ढांचा तैयार करने के संबंध में है. इसके तहत दोनों देशों के बीच सहभागिता और सहकार से जुड़ा एक संस्थागत तंत्र स्थापित होगा. जो इसका अनुपालन सुनिश्चित करेगा.
भारत और जापान के लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ेगा
सहभागिता समझौता भारत और जापान के लोगों के बीच आपसी संपर्क को बढ़ाएगा. यह भारतीय कामगारों और कुशल पेशेवरों को जापान भेजने में मदद करेगा. जापान में 14 निर्दिष्ट क्षेत्रों में काम करने के लिए ऐसे कुशल भारतीय कामगारों को भेजा जाएगा, जिन्होंने अनिवार्य कुशलता योग्यता प्राप्त करने के साथ जापानी भाषा की परीक्षा पास कर ली है.
14 क्षेत्रों में रोजगार के अवसर
इस समझौते के तहत नर्सिंग देखभाल, इमारतों की सफाई, सामग्री प्रसंस्करण उद्योग, औद्योगिक मशीनरी निर्माण उद्योग, इलेक्ट्रिक व उद्योगों से संबद्ध इलेक्ट्रानिक सूचना, निर्माण, पोत निर्माण एवं पोत से संबद्ध उद्योग, वाहनों का रखरखाव, विमानन, अस्थाई आवास मुहैया कराने, कृषि, मत्स्य पालन, खाद्य वस्तुएं एवं पेय निर्माण उद्योग और खानपान सेवा उद्योग जैसे 14 क्षेत्रों में कुशल भारतीय कामगारों के लिए जापान में रोजगार के अवसर निर्मित होंगे.
भारत-जापान संबंध
भारत और जापान के संबंध हमेशा से काफी मजबूत और स्थिर रहे हैं. जापान की संस्कृति पर भारत में जन्मे बौद्ध धर्म का स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता है. जापान की कई कम्पनियां जैसे कि सोनी, टोयोटा और होंडा ने अपनी उत्पादन इकाइयां भारत में स्थापित की हैं और भारत की आर्थिक विकास में योगदान दिया है.
भारत और जापान दोनों ही देश संयुक्त राष्ट्र के सदस्य है. साथ ही दोनों देश G-4 समूह (भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान) के सदस्य हैं, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिये एक दूसरे की दावेदारी का समर्थन करते हैं. भारत-जापान एसोसिएशन की स्थापना साल 1903 में की गई थी और वर्तमान में यह जापान में सबसे पुराना अंतरराष्ट्रीय मैत्री निकाय है.
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