पनामा पेपर्स खुलासे में नाम आने के बाद आइसलैंड के प्रधानमंत्री सिगमुडुर डेवियो गुनलॉगसन ने 5 अप्रैल 2016 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने राष्ट्रपति से संसद भंग करने की सिफारिश की थी जिसे ख़ारिज कर दिया गया, इसके उपरान्त उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया.
गुनलॉगसन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में फर्जी कपंनी बनाई. यह आरोप लगने के उपरान्त विपक्षी पार्टियों ने उनके इस्तीफे की मांग की तथा जनता प्रदर्शन करने लगी. देश के हालात देखते हुए राष्ट्रपति ओलफुर रंगनार ग्रिमसन अमेरिका दौरा बीच में ही छोड़कर वापिस आ गये.
गुनलॉगसन को पद से हटाने के लिए ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया जिसपर पहले ही दिन 16 हजार लोगों ने हस्ताक्षर किए.
पनामा पेपर्स लीक मामला
• इंटरनेशनल कन्सॉर्शियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स ने पनामा पेपर्स के नाम से यह ख़ुलासा किया.
• इसमें पनामा की लॉ फर्म मोसेक फोंसेका के लगभग 1 करोड़ 10 लाख दस्तावेज़ों का ख़ुलासा किया गया.
• इसमें 100 मीडिया समूहों के पत्रकारों को दिखाए गए दस्तावेज़ हैं जिनमें 70 देशों के 370 पत्रकारों ने 8 महीने तक इनकी जांच की.
• इस खुलासे में बताया गये कि विश्व के 72 मौजूदा एवं पूर्व राष्ट्र प्रमुखों ने फर्ज़ी कम्पनियां बनाकर पैसा रखा.
• आइसलैंड के प्रधानमंत्री और उनकी पत्नी का भी नाम इसमें शामिल था जिसमें दोनों पर पनामा की लॉ कंपनी द्वारा टैक्स हेवन में निवेश का आरोप लगाया गया.
• बशर अल असद, होस्नी मोबारक, मुआमार गद्दाफी द्वारा भी पैसा छुपाये जाने का दावा किया गया.
इंटरनेशनल कन्सॉर्शियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे)
• यह विश्व भर के 190 खोजी पत्रकारों का एक समूह है जिसमेँ 76 देशों के 109 मीडिया संस्थान शामिल हैं.
• 1997 में आईसीआईजे की स्थापना की गयी ताकि पत्रकारिता किसी देश की सीमा के भीतर सिमट कर न रह जाए एवं इसका बहुउद्देशीय उपयोग किया जा सके.
• इसमें वे अनुभवी लोग कार्यरत हैं जो सरकारी रिकॉर्ड पढ़ने में दक्ष होते हैं तथा तथ्यों की जांच करने वाले वकील भी इसमें शामिल हैं.
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