Aerial targeting systems: भारत सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से 120 कामिकेज़ ड्रोन और 10 एरियल टारगेटिंग सिस्टम की खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी है. भारतीय सेना के अधिकारियों ने 4 नवंबर, 2022 को इस बात की जानकारी दी. 'बाय इंडियन' कैटेगरी के तहत फास्ट ट्रैक प्रोसेस के जरिए लॉटरिंग सिस्टम और एरियल टारगेटिंग सिस्टम खरीदे जा रहे हैं.
इस खरीद के लिए जल्द ही आरएफपी जारी किया और खरीद के प्रस्तावों के लिए सूचना जारी की जाएगी. इस तरीके के ड्रोन खरीद से देश की बॉर्डर एरिया निगरानी में काफी मदद मिलेगी साथ ही घुसपैठ को रोकने में मदद मिलेगी. भारतीय सेना चीन से लगी सीमा पर इन ड्रोन सिस्टम को तैनात कर अपनी बॉर्डर प्रोटेक्शन को बढ़ा सकता है.
Indian Army has issued tender for procuring 10 sets of aerial targeting system along with 120 loitering munitions under fast track procedures as part of emergency procurement powers: Indian Army officials
— ANI (@ANI) November 3, 2022
बॉर्डर एरिया प्रोटेक्शन में मिलेगी मदद:
इन ड्रोन के भारतीय सेना में शामिल होने से चीन और पाकिस्तान से लगी सीमा पर निगरानी में काफी मदद मिलेगी. चीन के साथ इस समय के हालात को देखते हुए इस खरीद को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. भारत चीन से लगी सीमा की निगरानी और जवाबी कार्यवाई के लिए इन ड्रोन और एरियल टारगेटिंग सिस्टम का प्रयोग करेगा.
क्या है बॉर्डर एरिया प्रोटेक्शन के लिए भारत की योजना:
भारत पहले ही चीन से लगी सीमा पर K-9 वज्र ट्रैक्ड सेल्फ प्रोपेल्ड हॉवित्जर, पिनाका रॉकेट सिस्टम, अल्ट्रा-लाइट M-777 हॉवित्जर आदि की खरीद पूरा कर चूका है. विशेष रूप से, पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद के कारण यह खरीद काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
भारत, होम टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से 16 अक्टूबर को 363 ड्रोन खरीदने के लिए दो निविदाएं जारी की है. इन ड्रोन के मेकिंग में 60% स्थानीय रूप से सोर्स की गई सामग्री के उपयोग की शर्त है.
अनमैन्ड एयर व्हीकल (UAVs) के लिए भारतीय सेना ने कुछ अन्य नए टेंडर भी जारी किये है जिसमें हाई एल्टीट्यूड और मीडियम हाईट वाले लॉजिस्टिक्स ड्रोन और मानव रहित निगरानी हेलीकॉप्टर शामिल है.
कामिकेज़ ड्रोन (Kamikaze Drones) के बारें में:
ये छोटे मानव रहित विमान होते हैं जो विस्फोटकों से भरे होते हैं इनका उपयोग सीधे टैंक या सैनिकों के समूह पर किया जा सकता है. उन्हें स्विचब्लेड कहा जाता है क्योंकि उनके ब्लेड जैसे पंख लॉन्च पर बाहर निकलते हैं. वारहेड सहित इसका भार लगभग साढ़े पांच पाउंड होता है और यह 7 मील तक उड़ान भर सकता है.
रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC)
रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council) के तहत भारत में रक्षा खरीद को अंतिम रूप दिया जाता है इसकी अध्यक्षता रक्षामंत्री करते है. डीएसी खरीद पर रक्षा मंत्रालय का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है. इसके सदस्यों में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) और थल सेना, नौसेना और वायु सेना के प्रमुख शामिल होते है. डीएसी का मुख्य उद्देश्य आवंटित बजटीय संसाधनों के तहत सशस्त्र बलों की अनुमोदित आवश्यकताओं की शीघ्र खरीद सुनिश्चित करना है.
Comments
All Comments (0)
Join the conversation