भारत का पहला ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट IOC करेगा मथुरा रिफाइनरी में स्थापित  

मथुरा रिफाइनरी में स्थापित होने वाले इस भारत के पहले 'ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट’ का उद्देश्य भविष्य में तेल और ऊर्जा के स्वच्छ रूपों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए तैयार करना है.

Created On: Jul 22, 2021 15:01 ISTModified On: Jul 22, 2021 15:04 IST

भारत की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) अपनी मथुरा रिफाइनरी में देश का पहला 'ग्रीन हाइड्रोजन' प्लांट बनाएगा. इस कदम का उद्देश्य भविष्य में तेल और ऊर्जा के स्वच्छ रूपों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए तैयार करना है.

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन, और स्टोरेज टेक्नोलॉजी-स्पेस पर अनुसंधान को आगे बढ़ा रहा है, जहां वह अपने पेरिस जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए वैश्विक सहयोग का प्रयास  कर रहा है.

हाइड्रोजन उत्पादन: हमारे लिए महत्त्वपूर्ण जानकारी

हाइड्रोजन, अपने आप में एक स्वच्छ ईंधन है, लेकिन इसका निर्माण ऊर्जा-गहन है और इसमें कार्बन उप-उत्पाद भी निकलते हैं.

ब्राउन हाइड्रोजन का निर्माण कोयला गैसीकरण के माध्यम से होता है जबकि, ग्रे हाइड्रोजन बनाने की प्रक्रिया कार्बन कचरे को उत्पन्न करती है. दूसरी ओर, ग्रे हाइड्रोजन के निर्माण में उत्पन्न होने वाली ग्रीनहाउस गैसों के लिए कार्बन कैप्चर और भंडारण का ब्लू हाइड्रोजन उपयोग करता है.

भारत का पहला ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट: मुख्य विशेषताएं

• मथुरा स्थित संयंत्र भारत का पहला ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट (हरित हाइड्रोजन संयंत्र) होगा.
• IOC के अध्यक्ष ने यह बताया कि, उनकी कंपनी की राजस्थान में एक पवन ऊर्जा परियोजना है.
• इस ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट के लिए मथुरा रिफाइनरी को टीटीजेड (ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन) से इसकी निकटता के आधार पर चुना गया है.

हरित ऊर्जा का उपयोग करने के लिए IOC की विस्तार परियोजनाएं

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के अध्यक्ष ने यह बताया कि, IOC की सभी विस्तार परियोजनाएं ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ग्रिड बिजली के साथ ही प्राथमिक रूप से हरित ऊर्जा का उपयोग करेंगी.

वर्ष 2023-24 तक IOC अपनी शोधन क्षमता में 2.5 करोड़ टन की वृद्धि करने जा रही है. फिलहाल, CPCL समेत IOC की क्षमता 85 लाख टन है, जोकि अब 105 करोड़ टन होने जा रही है.

IOC की रिफाइनरी विस्तार योजनायें

  1. हरियाणा के पानीपत और बिहार के बरौनी में स्थापित मौजूदा इकाइयों की क्षमता बढ़ाना.
  2. चेन्नई में एक नई इकाई की स्थापना.

IOC की कई हाइड्रोजन उत्पादन इकाइयां स्थापित करने की है योजना

चूंकि हाइड्रोजन भविष्य के लिए उपयोगी ईंधन होगा इसलिए, कंपनी प्रायोगिक आधार पर कई हाइड्रोजन उत्पादन इकाइयां स्थापित करने की योजना बना रही है जिनमें निम्नलिखित शामिल होंगे:

• हाइड्रोजन ईंधन सेल बसों के लिए 99.9999 प्रतिशत की परिमित शुद्धता हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए गुजरात रिफाइनरी में एक परियोजना.
• पूरी तरह से भारत में निर्मित ईंधन सेल वाली लगभग 15 ईंधन-सेल-संचालित बसों के वर्ष, 2021 की दूसरी छमाही में चलने की उम्मीद है.

स्वच्छ ऊर्जा की ओर IOC का झुकाव: इसकी क्या है वजह?

• पेट्रोलियम शोधन और विपणन इस कंपनी का मुख्य व्यवसाय बना रहेगा और साथ ही, गैस एक बड़ी भूमिका निभाएगी.
• विभिन्न एजेंसियों के पूर्वानुमानों से यह पता चला है कि, भारतीय ईंधन की मांग वर्ष 2040 तक बढ़कर 400-500 मिलियन टन हो जाएगी, जबकि अभी यह 250 मिलियन टन है.
• IOC ने देश के कई शहरों में बैटरी स्वैपिंग स्टेशनों को भी चालू किया है. इस कंपनी ने देश भर में 286 चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए हैं और अगले 05 वर्षों में इसे बढ़ाकर 3,000 ईवी चार्जिंग स्टेशन कर दिया जाएगा.

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