चंद्र ग्रहण 2018: भारतीय परिपेक्ष्य में सुपर ब्लू ब्लड मून का महत्व

भारत में सबसे पहले ग्रहण का आरंभ असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम, सिक्किम, पश्चिम बंगाल में देखा जा सकेगा.

Created On: Jan 31, 2018 16:40 ISTModified On: Jan 31, 2018 17:10 IST

विश्व भर में वर्ष का पहला चन्द्र ग्रहण 31 जनवरी 2018 को दिखाई देगा. यह चंद्र ग्रहण कई मायनों में विशेष होगा क्योंकि यह लाल और नीला होने के साथ 150 वर्षों बाद दिखाई देगा.

चंद्र ग्रहण 2018 भारत के साथ-साथ अफ्रीका, एशिया, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप में भी दिखाई देगा. इससे पहले 31 मार्च 1866 में ऐसा नज़ारा देखने को मिला था. जबकि एशिया में यह 30 दिसंबर 1982 को देखने को मिलेगा.

भारत में सबसे पहले कहां?

भारत में सबसे पहले ग्रहण का आरंभ असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम, सिक्किम, पश्चिम बंगाल में देखा जा सकेगा. इसके उपरांत यह देश के बाकी हिस्सों में दिखेगा. भारत में चन्द्र ग्रहण शाम 5 बजकर 18 मिनट से शुरू होगा और 8 बजकर 41 मिनट पर खत्म होगा. वर्ष 2015 के बाद यह पहला पूर्ण चन्द्र ग्रहण है.

बिना चश्मे के देखा जा सकता है
सूर्य ग्रहण के दौरान सोलर रेडिएशन से आंखों के नाजुक टिशू डैमेज हो जाते है, जिस वजह से आखों में देखने में दिक्कत हो सकती है. इसे रेटिनल सनबर्न भी कहते हैं. ये परेशानी कुछ वक्त या फिर हमेशा के लिए भी हो सकती है लेकिन चंद्र ग्रहण के दौरान ऐसा नहीं होता. इस दिन चांद को नंगी आंखों से देखने से कोई नुकसान नहीं होता.

क्या है चंद ग्रहण?
जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है तब वह चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की किरणों को रोकती है और उसमें अपनी छाया बनाती है. इस घटना को चंद्र ग्रहण कहा जाता है. इसे ब्लड मून भी कहा जाता है.

सुपरमून और इसका महत्व
सुपरमून एक आकाशीय घटना है जिसमें चांद अपनी कक्षा में धरती के सबसे निकट होता है और संपूर्ण चांद का स्पष्ट रूप से अवलोकन किया जा सकता है.  31 जनवरी को होने वाली पूर्णिमा की तीन विशेषताएं हैं - पहली यह कि यह सुपरमून की एक श्रंखला में तीसरा अवसर है जब चांद धरती के निकटतम दूरी पर होगा. दूसरी, इस दिन चांद सामान्य से 14 प्रतिशत ज्यादा चमकीला दिखेगा. तीसरी बात, इस बार एक ही महीने में दो बार पूर्णिमा होगी, ऐसी घटना आमतौर पर ढाई साल बाद होती है. सूपर ब्लू मून धरती की छाया से गुजरेगी और प्रेक्षकों को पूर्ण चंद्रग्रहण दिखेगा. नासा की ओर से जारी एक बयान में कहा कि चांद जब धरती की छाया में रहेगा तो इसकी आभा रक्तिम हो जाएगी जिसे रक्तिम चंद्र या ब्लडमून भी कहते हैं.

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