ब्रिटेन में आम चुनावों में वोटिंग के बाद 09 जून 2017 को वोटों की गिनती की जा रही है. अब तक 642 सीटों के परिणाम घोषित किए जा चुके हैं. ब्रिटेन की पीएम थेरेसा मे की लीडरशिप वाली कंजरवेटिव पार्टी 312 सीटें जीतकर सबसे आगे है.
कंजरवेटिव पार्टी ने महज 28.7% महिलाओं को टिकट दिया. थेरेसा मे ने ब्रेग्जिट और आतंकवाद को प्रमुख मुद्दा बनाया. उन्होंने रिफ्यूजी पॉलिसी को बदलने के भी संकेत दिए.
मुख्य विपक्षी दल लेबर पार्टी को अब तक 260 सीटें प्राप्त हुई हैं. लेबर पार्टी दूसरे नंबर पर है. अब तक घोषित परिणामों में कोई भी पार्टी बहुमत के निकट नहीं पहुंची. लेबर पार्टी ने सबसे ज्यादा 41% महिलाओं को टिकट दिया. आम चुनाव के बाद ब्रिटेन में हंग पार्लियामेंट होना लगभग तय है.
ब्रिटेन के संविधान के अनुसार किसी भी पार्टी को बहुमत के साथ सरकार बनाने हेतु 326 सीटें जीतना आवश्यक है. 08 जून 2017 को ब्रिटेन संसद की कुल 650 सीटों के लिए वोट डाले गए.
ब्रिटेन की प्रधान मंत्री थेरेसा मे ने निर्धारित समय से तीन साल पहले चुनाव कराए थे जिसमे उन्हें पूर्व की अपेक्षा कम सीट प्राप्त हुई. थेथेरेसा मे ने साउथ-ईस्ट इंग्लैंड की मेडेनहेड सीट 37,780 वोटों से जीत ली है.
ब्रिटेन को मिली पहली महिला सिख सांसद-
- ब्रिटेन को पहली महिला सिख सांसद मिल गई. भारतीय मूल की लेबर पार्टी कैंडिडेट प्रीत कौर गिल ने बर्मिंघम एजबेस्टन सीट 24,124 वोटों से जीत ली. इसके अलावा तनमनजीत सिंह धेसी ने स्लॉघ सीट 34,170 वोटों से जीती है. ये लेबर पार्टी के पहले पगड़ी वाले सिख सांसद हैं.
- ब्रिटिश चुनाव में भाग लेने वाली महिलाओं की संख्या में 1918 से लेकर अब तक 30% की बढ़ोत्तरी हुई. प्रमुख पार्टियों में 2015 में 10% महिलाएं संसद पहुंची थीं.
ब्रिटेन में भारतीयों को वोट का अधिकार-
- ब्रिटेन में आयोजित आम चुनाव में भारतीय मूल के कुल 56 कैंडिडेट्स मैदान में हैं. वोटिंग से एक दिन पहले ही एग्जाम देने वाले 18 साल के एरन को ग्रीन पार्टी ने टिकट दिया.
- ब्रिटेन में कामकाजी भारतीय बड़ी संख्या में हैं. इनमें से अधिकतर के पास ब्रिटेन की सिटिजनशिप नहीं है, किन्तु ब्रिटेन में रहते हुए 6 महीने से अधिक हो जाने पर उन्हें वोट का अधिकार मिल जाता है.
- इस कारण 2011 के चुनाव में 266,000 से अधिक कामकाजी भारतीयों को वोटिंग का मौका मिला. तब से भारतीयों की संख्या ब्रिटेन में बढ़ी है.
ब्रिटेन विश्व की 5वीं बड़ी इकोनॉमी-
- ब्रिटेन विश्व की 5वीं बड़ी इकोनॉमी है. ब्रिटेन के इस चुनाव से न केवल ईयू और ब्रिटेन बल्कि पूरी दुनिया प्रभावित होगी. ब्रिटेन यूएन काउंसिल में वीटो प्राप्त परमानेंट मेंबर के अलावा जी-7 और जी-20 का भी मेंबर है.
- जीडीपी के मामले में दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी भी है. ग्लोबलाइजेशन के इस युग में ब्रिटिश चुनाव नतीजे भारत समेत पूरी दुनिया को जरूर प्रभावित करेंगे.
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