प्रत्येक 12 वर्ष में एक बार आयोजित किये जाने वाले बौद्ध धर्म के नारोपा उत्सव का 16 सितंबर 2016 को आरंभ हुआ. यह आयोजन भारत के लद्दाख क्षेत्र में द्रुक्पा वंश के हेमिस मठ में आयोजित किया जाता है. इस उत्सव का समापन 22 सितंबर 2016 को होगा.
सैंकड़ों बौद्ध अनुयायी, श्रद्धालु एवं पर्यटक इस उत्सव में शामिल होने के लिए लद्दाख पहुंचे. इसे हिमालय क्षेत्र का कुम्भ भी कहा जाता है.
इस अवसर पर रेशम के सांस्कृतिक परिधान पहनकर, ड्रम एवं पाइप के संगीत पर नृत्य किया जाता है. इस वर्ष बौद्ध संत नारोपा का 1000वां जन्मदिवस मनाया जा रहा है.
इसके अलावा 19 सितंबर 2016 को बुद्ध अमिताभ की 60 फीट ऊँची रेशम से सुसज्जित मूर्ति अनावरित की गयी.
नारोपा महल में एक विशेष स्टैंड बनाया गया जहां से रेशम से सजाये गये विशेष परिधान एवं अन्य मूर्तियों को देखा जा सकता है.
संत नारोपा
• नारोपा एक बौद्ध महासिद्ध थे.
• वे अतिसा के समकालिक माने जाते हैं जो बंगाली बौद्ध धार्मिक नेता थे.
• नारोपा का जन्म बंगाल के उच्च जातीय ब्राह्मण परिवार में हुआ.
• 28 वर्ष की आयु में उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय में सूत्र और तंत्र की शिक्षा ग्रहण की.
• उन्हें उत्तरी द्वार के रक्षक पदवी से सम्मानित किया गया.
• वे तिलोप के शिष्य थे.
• कुछ शोध बताते हैं कि नारोपा, मारपा लोत्स्वा के शिक्षक थे जबकि कुछ शोधपत्रों के अनुसार मारपा मध्यस्थ शिष्यों द्वारा नारोपा की शरण में आये थे.
हेमिस मठ
• यह लद्दाख में स्थित बौद्ध मठ है जो वास्तव में तिब्बती मठ है.
• यह मठ 11वीं सदी से मौजूद है.
• संत नारोपा इसी मठ से जुड़े हुए थे.
• लद्दाख के राजा संगे नंग्यल द्वारा 1672 में इस मठ का जीर्णोद्धार किया गया.
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