व्हाइट हाउस द्वारा दिसंबर 2016 के चौथे सप्ताह में आर्कटिक और अटलांटिक महासागर में गैस, तेल के खनन पर पूर्णतः प्रतिबन्ध लगाये जाने की घोषणा की गयी.
इस कदम को राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को सत्ता सौपने से पहले एक सशक्त कदम बताया जा रहा है.
प्रतिबन्ध लगाया गया स्थान लगभग पूरे थाईलैंड ओर स्पेन के आकार का है. ओबामा ने इस आदेश को जारी करने हेतु 1953 के उस क़ानून का उपयोग किया जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति अमेरिका से बाहर किसी क्षेत्र में होने वाले खनन को रोकने का आदेश दे सकता है. उनके बाद बनने वाले राष्ट्रपति के लिए यह आदेश बदलना कठिन होगा.
इस प्रतिबन्ध की घोषणा ओबामा एवं कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूदियू द्वारा संयुक्त रूप से जारी की गयी.
प्रतिबन्ध का कारण
बराक ओबामा द्वारा यह प्रतिबन्ध उस समय लगाने की घोषणा की गयी जब उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है. यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ट्रम्प से उनके वैचारिक मतभेदों के अनुरूप है.
ओबामा ने वर्ष 2015 में पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते पर हस्ताक्षर किये थे तथा ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए उचित कदम उठाये जाने की प्रतिबद्धता भी जताई थी. ट्रम्प ने पेरिस जलवायु समझौते पर भिन्न राय व्यक्त करते हुए उसे स्थगित करने की बात कही थी.
ओबामा का यह निर्णय ट्रम्प के लिए इन दोनों महासागरों में खनन के निर्णय के लिए रुकावट बनेगा. इस प्रतिबन्ध को वापस लेने के लिए ट्रम्प को इस निर्णय के खिलाफ न्यायालय में चुनौती पेश करनी होगी.

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