शादी या तलाक के बाद पासपोर्ट पर महिलाओं को अपना पूर्व नाम रखने की स्वतंत्रता प्रदान की गयी है. महिलाएं अपने माता या पिता दोनों में से किसी एक का भी नाम देकर पासपोर्ट बनवा सकती हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के सशक्तीकरण के संदर्भ मे यह घोषणा की.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्योग संगठन इंडियन मर्चेंट्स चैंबर (महिला प्रकोष्ठ) के के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर समारोह को वीडियो लिंक के माध्यम से संबोधित कर रहे थे. प्रधानमंत्री के अनुसार पासपोर्ट नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं.
प्रमुख तथ्य-
- जारी की गयी नई गाइड लाइंस के अनुसार अब किसी महिला को अपनी शादी या तलाक का प्रमाणपत्र देना आवश्यक नहीं होगा.
- यह महिला के निर्णय पर निर्भर करेगा कि वह पासपोर्ट पर अपने पिता या माता दोनों में से किसका नाम रख सकती है.
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर अन्य योजनाएं के बारे में भी जानकारी प्रदान की.
महिला सशक्तीकरण हेतु अन्य योजनाएं-
- जैसे 70 प्रतिशत मुद्रा लोन महिला उद्यमियों को दिये जाने की योजना भी इसमे शामिल है.
- केंद्र सरकार ने महिलाओं को केंद्र की सभी योजनाओं में पहला अधिकार देने का भी फैसला किया है.
- केंद्र सरकार की प्राथमिकता है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाये जा रहे घरों की रजिस्ट्री उस परिवार की किसी महिला सदस्य के नाम पर हो.
- केंद्र सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन देकर अब तक दो करोड़ महिलाओं को चूल्हों के नुकसानदायक प्रभावों से बचाया है.
- केंद्र सरकार का लक्ष्य इस योजना के तहत अगले दो सालों में पांच करोड़ और परिवारों को जोडऩा है.
- महिला सशक्तीकरण के तहत ही मातृत्व अवकाश को 12 हफ्तों से बढ़ाकर 26 हफ्तों का करने और अस्पतालों में बच्चे को जन्म देने वाली महिलाओं के बैंक खाते में 6,000 रूपए के हस्तांतरण का सरकार का संकल्प भी इसी दिशा में किये गये प्रयास हैं.
- सुकन्या समृद्धि योजना के तहत एक करोड़ से ज्यादा बैंक खाते खोले गये.
महिला सशक्तीकरण के ‘लिज्जत पापड़’ और ‘अमूल’ इस बात के शानदार उदाहरण हैं. महिलाओं में सफलता पाने हेतु संघर्ष करने का धैर्य, योग्यता और आत्मविश्वास है.

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