भारत में अब दुनिया का सबसे बड़ा एक्सप्रेस-वे बनाया जा रहा है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री, नितिन गडकरी ने 17 सितंबर 2021 को घोषणा की कि सरकार दुनिया के सबसे लंबे राजमार्ग, यानी दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस राजमार्ग का निर्माण कर रही है.
केंद्रीय मंत्री गडकरी ने इस कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि एक्सप्रेसवे 1,380 किमी लंबा होगा और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) तक जाएगा, लेकिन अब, हम इसे नरीमन पॉइंट तक ले जाने की भी योजना बना रहे हैं. उनके मुताबिक, यह परियोजना मार्च 2022 तक पूरी हो जाएगी और भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे होगा.
मुंबई और दिल्ली के बीच की दूरी
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि पहले ट्रक से मुंबई और दिल्ली के बीच की दूरी को तय करने में लगभग 48 घंटे और कार से 24-26 घंटे लगते थे. लेकिन अब, दिल्ली और मुंबई के बीच की दूरी को ट्रक से 18-20 घंटे और कार से केवल 12-13 घंटे लगेंगे.
रोजगार के कई अवसर
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि यह राजमार्ग राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के आदिवासी जिलों से होकर गुजर रहा है. इससे इन क्षेत्रों का विकास होगा. लोगों के लिए रोजगार के कई अवसर पैदा होंगे.
जानिए क्या है खास बात
- अभी इस एक्सप्रेस-वे में आठ लेन हैं लेकिन ट्रैफिक के मुताबिक इसे 12 लेन तक बढ़ाया जा सकता है.
- इस एक्सप्रेस-वे के चलते 50 लाख से अधिक दिनों के काम के साथ हजारों प्रशिक्षित सिविल इंजीनियरों को रोजगार मिला है.
- हाईवे पर 20 लाख से अधिक पेड़ों व झाड़ियों को भी लगाए जाने की योजना है.
- प्रोजेक्ट के तहत आठ लेन वाली दो आइकॉनिक सुरंग का भी निर्माण किया जाएगा.
- इस एक्सप्रेस-वे के किनारे रिजॉर्ट्स, फूड कोर्ट्स, रेस्तरां, फ्यूल स्टेशंस, लॉजिस्टिक पार्क और ट्रक वालों के लिए फैसिलिटीज जैसी सुविधाएं रहेंगी.
- कोई एक्सीडेंट होने पर हेलीकॉप्टर एंबुलेंस सर्विस की सुविधा रहेगा और यहां हेलीपोर्ट भी रहेगा जो बिजनेस के लिए ड्रोन सर्विसेज का प्रयोग करेंगी.
- यह एशिया का पहला और दूसरा हाईवे प्रोजेक्ट है जिसमें जानवरों के लिए भी रास्ते बनाए जा रहे हैं ताकि वाइल्डलाइफ मूवमेंट पर असर न पड़े.
- हाईवे के चलते सालाना 32 लाख लीटर से अधिक तेल की बचत होगी और कॉर्बन डाई ऑक्साइड उत्सजर्न में भी 85 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी.
- प्रोजेक्ट के तहत 12 लाख टन स्टील का इस्तेमाल होगा जिससे 50 हावड़ा ब्रिज बनाए जा सकते हैं.
- प्रोजेक्ट के तहत 80 लाख टन स्टीन की खपत होगी जो देश में सालाना सीमेंट उत्पादन का करीब 2 प्रतिशत है.
प्रोजेक्ट की शुरुआत
इस हाईवे प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 2018 में हुई थी और इसके तहत फाउंडेशन स्टोन 09 मार्च 2019 को रखा गया. प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद इस एक्सप्रेस-वे के चलते जयपुर, अजमेर, किशनगढ़, चित्तौड़गढ़, कोटा, उददयपुर, उज्जैन, भोपाल, इंदौर, वडोदरा, अहमदाबाद और सूरत जैसे देश के कई इकोनॉमिक हब के बीच आागगमन बेहतर होगा. यह एक्सप्रेस-वे 1380 किमी लंबा है. इसके कंसट्रक्शन के लिए राज्यों में 15 हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन हासिल की जा चुकी है.
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