उत्तराखंड में लोक सेवकों की अवैध रूप से अर्जित धन या संपत्ति के अधिग्रहण संबंधी विधेयक को राज्य कैबिनेट ने 20 सितंबर 2011 को मंजूरी प्रदान की. इसके साथ ही लोक सेवा अधिकार, सरकारी सेवकों के लिए तबादला नीति के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई. उत्तराखंड कैबिनेट ने राज्य के अनुपूरक बजट के साथ जनहित में कई महत्वपूर्ण फैसलों पर भी मंजूरी दी.
उत्तराखंड में लोक सेवकों की अवैध रूप से अर्जित धन या संपत्ति के अधिग्रहण संबंधी विधेयक के तहत भ्रष्टाचार के मामलों के लिए विशेष अदालतों का गठन शामिल है. इन विशेष अदालतों द्वारा अनधिकृत अर्जित संपत्ति या धन का अधिग्रहण राज्य सरकार के राजस्व विभाग में जाने का प्रावधान है. साथ ही इसमें संबंधित लोकसेवक को भी पक्ष रखने का मौका दिया गया है.
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूड़ी की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट ने बेनाप भूमि को रक्षित वन भूमि घोषित करने के निर्णय को भी निरस्त कर दिया. इस निर्णय से पर्वतीय जिलों में ग्राम पंचायत की बेनाप जमीन वन विभाग के खाते में नहीं जाएगी. बेनाप भूमि को रक्षित वन भूमि घोषित करने का निर्णय ब्रिटिश शासनकाल में 17 अक्टूबर 1893 और फिर अविभाजित उत्तरप्रदेश शासन के 17 मार्च 1997 के शासनादेश में लिया गया था.
उत्तराखंड में लोक सेवा अधिकार विधेयक के प्रस्तावित मसौदे में राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, खतौनी, आय प्रमाण पत्र समेत अन्य नागरिक सेवाएं चिन्हित की गई हैं. सरकारी सेवकों के लिए तबादला नीति के प्रस्ताव के तहत उत्तराखंड में प्रत्येक वर्ष राज्य कर्मचारियों के तबादलों के लिए नया एक्ट लागू किया जाना है. इसके साथ ही सुगम क्षेत्र में पांच वर्ष से अधिक अवधि तक तैनात कर्मियों को दुर्गम क्षेत्रों में अनिवार्य सेवाएं देनी आवश्यक है.
उत्तराखंड में ई-गवर्नेस के पहले चरण में चार जिलों दून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर और नैनीताल में ई-स्टैंपिंग व्यवस्था लागू की गई. अब इन जिलों में लोगों को स्टांप वेंडरों के साथ-साथ आनलाइन स्टांप भी उपलब्ध होंगे.
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