जगदम्बिका पाल की अध्यक्षता में सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति ने 10 फ़रवरी 2014 को भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा खरीद की हिस्सेदारी पर संसद में अपनी रिपोर्ट रखी. संसदीय समिति ने कहा भारतीय खाद्य निगम के शेयर मूल्यों (एफसीआई) की खरीद में धीरे-धीरे प्रतिशत और मात्रा दोनों के संदर्भ में गिरावट आ रही है.
अपनी टिप्पणी में पैनल ने उल्लेख किया कि विभिन्न फसलों के आंकड़ों में गिरावट जारी है, जो इस प्रकार हैं-
• गेहूं शेयर वर्ष 2008-09 में 53 लाख टन से करीब 40 लाख टन नीचे चला गया.
• धान (चावल के मामले में) वर्ष 2006-07 के 18 लाख की तुलना में 2011-12 में 3 लाख टन नीचे है.
समिति द्वारा भारतीय खाद्य निगम की जांच करने से पता चला कि एजेंसी ने वर्ष 1997-98 में विकेन्द्रीकृत उपार्जन योजना की शुरूआत के साथ अपनी खरीद गतिविधि छोड दी थी. अपनी रिपोर्ट में समिति ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लागू होने के साथ खाद्यान्न की खरीद बढ़ाने की जरूरत की सिफारिश की है. एफसीआई को प्रभावी ढंग से अपनी उचित भूमिका निभाने और अपनी खरीद गतिविधियों का विस्तार और खरीद में इसकी हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए भी समिति द्वारा आग्रह किया गया है. अपनी सिफारिश में समीति ने एफसीआई सेट अप के लिए अधिक खरीद केन्द्रों में को लगाने का सुझाव दिया तांकि किसान मजबूरन अन्य बिक्री केन्द्रों में ना जायें.
कानून को लागू करने के लिए सरकार की अनुमानित लागत 130000 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसके लिए कम से कम 62 लाख टन खाद्यान्न की आवश्यकता होगी. पैनल ने भंडारण क्षमता के बारे में बेहतर योजना पर तत्काल आधार पर कार्रवाई करने के लिए भी भारतीय खाद्य निगम को सुझाव दिया है. वर्तमान में भारतीय खाद्य निगम द्वारा अधिकतम खाद्यान्न शेयर मौजूदा मानदंडों में 26 लाख टन हैं में जिसमें अप्रैल 2005 के बाद से कोई संशोधन नहीं किया गया है.
पृष्ठभूमि
पैनल की रिपोर्ट ने अपनी सिफारिश में खाद्य सुरक्षा कानून के सफल और सकारात्मक कार्यान्वयन के लिए भारतीय खाद्य निगम को अपनी खरीद की गतिविधियों को बढ़ाने के लिए सुझाव दिया गया है जिसके निर्माण का उद्देश्य 67 प्रतिशत जनसंख्या के लिए रियायती दर पर खाद्यान्नों का कानुनी अधिकार प्रदान करना है. कानून सितंबर 2013 में संसद द्वारा पारित किया गया था और इसे वर्तमान में 10 राज्यों में लागू किया जा रहा है.
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के बारे में
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) सरकार की ओर से खाद्यान्न खरीदता और वितरित करता है जोकि केन्द्र सरकार की नोडल एजेंसी है. इसकी स्थापना खाद्य नीति के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए खाद्य निगम के अधिनियम 1964 के तहत की गयी थी। इसके उद्देश्य हैं-
• किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी मूल्य समर्थन संचालन.
• सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए पूरे देश में खाद्यान्नों का वितरण.
• राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाद्यान्नों के परिचालन और बफर स्टॉक के संतोषजनक स्तर को बनाए रखना.
अपनी स्थापना के बाद, भारतीय खाद्य निगम ने एक स्थिर सुरक्षा प्रणाली संकट से प्रबंधन उन्मुख खाद्य सुरक्षा को बदलने में भारत की सफलता में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.


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