राज्यों के हिसाब-किताब के मौजूदा तरीके में बदलाव के लिए 21 जून 2011 को बुलाई गई राज्यों के वित्त मंत्रियों की बैठक में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा एक्रुअल आधारित वित्तीय रिपोर्टिंग (Accrual based financial reporting in government) हेतु दिशा-निर्देश जारी किया गया. ज्ञातव्य हो कि वर्तमान में राज्यों का खाता-बही रखने का तरीका नकदी आधारित होता है. यानी जिस मद में पैसा मिलता है और जहां खर्च होता है उसका उल्लेख होता है.
एक्रुअल आधारित वित्तीय रिपोर्टिंग (Accrual based financial reporting in government) में राज्यों को भविष्य की देनदारियों और उन पर पड़ने वाले बोझ का भी विस्तार से उल्लेख करना शामिल है. उदहारण के तौर पर वर्तमान व्यवस्था में राज्यों के वित्तीय खातों में आगामी वर्षो में पेंशन मद में होने वाले खर्च का कोई उल्लेख नहीं होता है, जबकि नई व्यवस्था में इसका उल्लेख अनिवार्य हो जाना है. वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के अनुसार नए तरीके को अपनाना आसान नहीं है, परंतु इसके लागू होने से कई वित्तीय व आर्थिक फायदे हो सकते हैं.
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने राज्यों के वित्त मंत्रियों को संबोधित करते हुए यह बताया कि नई एक्रुअल आधारित अकाउंटिंग व्यवस्था (Accrual based Accounting system in government) इसलिए भी जरूरी हो गई है क्योंकि अब विदेशी सरकारें व अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां वित्तीय मदद देने के लिए इसकी शर्त रखने लगी हैं. भारत के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (Comptroller & Auditor-General of India) विनोद राय के अनुसार सभी राज्यों में एक्रुअल आधारित अकाउंटिंग व्यवस्था लागू करने में पांच से छह वर्ष का समय लग सकता है. नई व्यवस्था के दिशानिर्देश को भारत के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक ने ही तैयार किया है. नई व्यवस्था को अपनाने के लिए 21 राज्यों ने अपनी मंजूरी दी है.
Comments
All Comments (0)
Join the conversation