केंद्र सरकार ने घरेलू बचत को बढ़ावा देने के लिए 18 नवंबर 2014 को नई दिल्ली में किसान विकास पत्र योजना (केवीपी) की फिर से शुरुआत की. प्रारंभ में किसान विकास पत्र डाकघरों के माध्यम से बेचे जाएंगे. इसके बाद ये राष्ट्रीयकृत बैंकों की कुछ शाखाओं पर उपलब्ध कराए जाएंगे. नए किसान विकास पत्र में धनराशि 8 वर्ष और चार माह में दोगुनी होगी. कोई भी व्यक्ति 1000, 5000, 10000 और 50000 रुपये के किसान विकास पत्र (केवीपी) खरीद सकेगा.
इसमें निवेश की कोई ऊपरी सीमा अनिवार्य नहीं की गई. किसान विकास पत्र से न सिर्फ निवेश के लिए सुरक्षित विकल्प मिलेगा, बल्कि इससे देश में बचत दर भी बढ़ेगी. वित्त वर्ष 2012-13 में बचत दर लगभग 30 प्रतिशत है. किसान विकास पत्र बचत योजना वर्ष 1988 में शुरू की गई थी. उस समय इसमें 5 वर्ष 6 माह में धन दोगुना हो जाता था. हालांकि इस योजना को नवंबर, 2011 से स्थगित कर दिया गया. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने चालू वित्त वर्ष के लिए बजट पेश करते हुए अपने बजट भाषण में इस योजना को फिर से शुरू करने की घोषणा की थी.
ये प्रमाण-पत्र एकल या संयुक्त नामों से खरीदे जा सकते हैं और इन्हें कई बार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के नाम स्थानांतरित किया जा सकता है. साथ ही इन्हें एक पोस्ट ऑफिस से दूसरे में भी स्थानांतरित किया जा सकता है. किसान विकास पत्र में किए गए निवेश की लॉक इन अवधि 2 वर्ष छह महीने की होगी. उसके बाद यह पूर्व में तय परिपक्वता मूल्य के हिसाब से 6 माह के ब्लॉक में होगी. किसान विकास पत्र से छोटे निवेशक धोखाधड़ी वाली योजनाओं से भी बच सकेंगे. इस योजना के तहत जुटाई गई राशि सरकार के पास रहेगी जिसका इस्तेमाल केंद्र और राज्यों की विकास योजनाओं में किया जाएगा.
किसान विकास पत्र एक प्रमाण पत्र बचत योजना है, जिसे सरकार ने 1 अप्रैल 1988 को लांच किया था. उस समय इसकी परिपक्वता अवधि 5 वर्ष 6 माह था, यानी इतनी अवधि में इसमें लगाए गए पैसे दोगुने हो जाते थे. बाद में जब ब्याज दरें घटीं, तो परिपक्वता अवधि बढ़ने लगी. यह योजना निवेशकों के बीच बेहद लोकप्रिय रही. वर्ष 2010-11 में इस योजना के तहत 21631.16 करोड़ रुपए का सकल संग्रह हुआ था, जो उस वर्ष हुए कुल सकल संग्रह का 9 फीसदी था. वर्ष 2011 में जब इसे बंद किया गया, तो इसकी परिपक्वता अवधि 7 वर्ष 11 महीने थी.
किसान विकास पत्र की विशेषताएं
• एक डाकघर से दूसरे में स्थानांतरित किया जा सकेगा
• इसे बैंक के पास गिरवी रखकर ऋण भी लिया जा सकेगा
• केवीपी को अकेले या संयुक्त तौर पर खरीदा जा सकता है
• एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर करना भी संभव होगा
• दो वर्ष और छह महीने से पहले केवीपी की राशि नहीं निकाली जा सकेगी
• किसान विकास पत्र में निवेश की कोई सीमा नहीं होगी.
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