संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 27 मार्च 2014 को एक गैर बाध्यकारी प्रस्ताव पारित किया जो यूक्रेन से अलग हुए क्रीमिया प्रायद्वीप को रूस में विलय करने की मान्यता को रद्द करता है. 193 सदस्यीय महासभा में 110 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया जबकि 11 ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया. भारत सहित 58 देश मतदान से अनुपस्थित रहे.
रूसी विदेश मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को यूक्रेन के आंतरिक राजनीतिक संकट को मुश्किल करने का प्रयास करार दिया.
अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने चेतावनी दी थी कि यदि रूस यूक्रेन में और ज्यादा कब्जे की कोशिश करता है तो यूरोपीय संघ और अमरीका उसके खिलाफ और कड़े प्रतिबंध लगा देंगे.
पृष्ठभूमि
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने क्रीमिया को स्वतंत्र देश के तौर पर मान्यता देने वाले आदेश-पत्र पर मास्को के क्रेमलिन में 18 मार्च 2014 को हस्ताक्षर किए थे. इस हस्ताक्षर से क्रीमिया के रूस में विलय का रास्ता साफ हो गया है. यूक्रेन से अलग होने और रूस में शामिल होने के लिए क्रीमिया में 16 मार्च 2014 को जनमत-संग्रह कराया गया था. इस जनमत-संग्रह में 97 प्रतिशत मतदाताओं ने यूक्रेन से अलग होने के पक्ष में मतदान किया. यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने इस जनमत-संग्रह को असंवैधानिक घोषित किया.

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