मौलवियों के एक समूह ने कश्मीर में 26 दिसंबर 2013 को फतवा जारी किया, जिसके मुताबिक वैसी महिलाएं जिनके पति बीते चार वर्षों से लापता है, पुनर्विवाह कर सकती हैं.
जम्मू और कश्मीर के धार्मिक मौलवियों ने यह फैसला किया कि जिन महिलाओं के पति हिरासत में या किन्हीं अन्य कारणों से बीते 20 वर्षों से लापता हैं, वे उनके लापता होने के 4 वर्षों के बाद पुनर्विवाह कर सकती हैं.
मुस्लिम विवाह अधिनियम 1939 के विघटन के मुताबिक मुस्लिम कानून के तहत शादी करने वाली महिला को चार वर्षों से अधिक समय तक उसे पति के ठिकाने के बारे में नहीं पता हो तो उसे अपनी शादी खत्म करने का कानूनी हक होता है.
मानवाधिकार समूहों का कहना है कि बीते 20 वर्षों से लापता लोगों की संख्या 8,000 से ज्यादा है और उनमें से लगभग एक चौथाई लोग शादीशुदा हैं.
इस्लामी मौलवियों ने कश्मीरी महिलाओं के पुनर्विवाह के बारे में विचार–विमर्श करने के लिए तीन दौर आयोजित किए और फिर फतवा जारी किया.
फतवा इस्लाम में एक प्रकार की कानूनी घोषणा होती है जो विशिष्ट मुद्दों पर धार्मिक कानून के विद्वानों द्वारा जारी की जाती है.
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