4 सितंबर 2015 को जम्मू और कश्मीर के उच्च न्यायालय ने राज्य के क्रिकेट संघ के करोड़ों रुपयों वाले घोटाले की जांच सीबीआई को करने के आदेश जारी कर दिए. यह घोटाला इसके अध्यक्ष के तौर पर राज्य के भूतपूर्व मुख्य मंत्री फारुख अब्दुल्ला के कार्यकाल के दौरान हुआ था.
सीबीआई को अपनी जांच छह माह में पूरी कर लेने को कहा गया है.
मुख्य न्यायाधीश एन पॉल वसंतकुमार और न्यायाधीश बंसी लाल भट वाली अदालत की खंडपीठ ने यह आदेश 2012 में जम्मू और कश्मीर क्रिकेट संघ (जेकेसीए) में हुए घोटाले में लिप्त दो क्रिकेटरों द्वारा दायर की गई जनहित याचिका की सुनवाई के बाद जारी किया . जनहित याचिका दायर करने वाले ये दो क्रिकेटर हैं–माजिद याकूब डार और निस्सार अहमद खान.
इससे पहले, इस कथित घोटाले की जांच विशेष जांच टीम कर रही थी लेकिन यह टीम करीब तीन वर्षों में भी अपनी जांच पूरी कर पाने में विफल रही.
17 पन्नों के अपने आदेश में अदालत ने माना कि अपराध शाखा राज्य सरकार के गृह विभाग का एक अंग है जो संभव है प्रभाव और रसूख के सामने काम करने में सक्षम नहीं हो पा रही है. इसलिए जांच का काम सीबीआई को अपने हाथ में लेने और यथासंभव तेजी से, अधिमानतः छह माह में तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने को कहा गया है.

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