नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप ने 23 मई 2015 को आकाशगंगा में एक तारे की खोज की जिसका नाम नैस्टी-1 (Nasty 1) रखा गया.
खगोलविदों ने इसका नाम एनएएसटी-1 अथवा नैस्टी-1 इसके तीव्रता से बदलने वाले स्वरुप के कारण रखा है. खगोलविदों का मानना है कि इस तारे में तारा हाइड्रोजन की परतें तेज़ी से नष्ट हो रही हैं जिसके चलते इसमें अत्यधिक चमक के साथ विस्फोट हो रहा है.
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रमुख शोधकर्ता, बर्कले जॉन मौरेहन ने शोधपत्र में लिखा कि वे इस ‘डिस्क’ जैसे दिखने वाला सितारा वुल्फ-रायेट स्टार भी हो सकता है.
वुल्फ-रायेट स्टार का अर्थ है लगातार तेज़ी से बढ़ने वाला सितारा जो कि सूर्य से कई गुना बड़ा हो सकता है.
वर्तमान अनुमानों के आधार पर तारे के आसपास मौजूद निहारिका कुछ हज़ार वर्ष पुरानी है तथा पृथ्वी से 3,000 प्रकाश वर्ष दूर है.
इसके लगातार बढ़ते रहने के कारण यह गैस तथा धूल से ढका हुआ है. वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में इसमें विस्फोट हो सकता है तथा बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं अथवा यह तारा नष्ट भी हो सकता है.
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