नासा के वैज्ञानिकों ने ग्रहों की अंतरखगोलीय धूल कण के निर्माण में भी सफलता प्राप्त की. इसके अतिरिक्त, वैज्ञानिकों को वायुमंडल में “रेड जिएंट तारे” के निर्माण की प्रक्रिया को प्रयोगशाला में निर्मित करने में भी कामयाबी मिली. संपूर्ण प्रक्रिया का पृथ्वी पर ही क्रियान्वन किया गया तथा इसकी आधिकारिक घोषणा 7 मई 2014 को नासा द्वारा की गई.
जिस विशेष प्रक्रिया के तहत वायुमंडल के अंदर “रेड जिएंट तारे” का निर्माण हुआ है उसे “कास्मिक सिम्यूलेशन चेंबर” का नाम दिया गया है. कास्मिक का निर्माण और इसका डिजायन एम्स में ही तैयार किया गया और वैज्ञानिकों द्वारा धूल के कणों के निर्माण तथा उनका अध्ययन उसी प्रकार किया गया जिस प्रकार प्रयोगशाला में मृत तारो के बाह्य सतह पर धूल के कणों का निर्माण होता है.
इस विशेष प्रक्रिया की सहायता से वैज्ञानिक धूल के कणों से ब्रंह्मांड की संरचना तथा उसके क्रमिक विकास के सबूतों को एकत्रित करने में सहायता मिलेगी.
वैज्ञानिको ने अपने अध्ययन से निष्कर्ष निकाला कि जिस पदार्थ से ब्रंह्मांड की ब्लाक संरचना का निर्माण होता है, वह अपने वास्तविक पूर्वानुमान से अत्यधिक जटिल है.
प्रयोगात्मक प्रक्रिया
वैज्ञानिकों की टीम ने प्रक्रिया की शुरुआत एक हाइड्रोकार्बन अणु को कास्मिक के जेट स्प्रे में विस्तार देने से की जिसे बाद में तीव्र उर्जा के इलैक्ट्रिक डिस्चार्ज के साथ अनावृत किया गया. तदुपरांत उन्होंने बड़े अणुओं को अत्यधिक संवेदनशील डिटेक्टरो के माध्यम से देखा जो गैस अवस्था में गठित हो रहे थे. ये अग्रदूत अणु अपने अलग-अलग ठोस कणों को एकत्रित कर रहे थे. इन जटिल अणुओं की इमेज को एम्स स्कैनिंग इलैक्ट्रान माइक्रोस्कोप से लिया गया.

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