न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री जॉन के ने भारत के प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के निमंत्रण पर 26-30 जून 2011 तक भारत का राजकीय दौरा किया. न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री के साथ वहां के व्यापार मंत्री टिम ग्रोशर, संसद सदस्य कंवलजीत सिंह बख्शी और एक उच्चस्तरीय व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल भी आया. यात्रा के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों की उपस्थिति में फिल्म उद्योग से जुड़े वर्तमान संबंधों का लाभ उठाते हुए श्रव्य दृश्य सह उत्पादन के एक करार पर हस्ताक्षर किया गया. इस करार से दोनों पक्ष उद्योग के स्तर पर सहयोग को प्रोत्सा्हित कर पाएंगे, सर्जनात्मतक प्रतिभा का आदान-प्रदान कर पाएंगे और दोनों देशों के जीवन्त फिल्म उद्योग को सहायता दे सकेंगे. इस समझौते पर न्यू्जीलैंड की भारत में उच्चायुक्त जॉन हेंडरसन और भारत के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव रघु मेनन ने हस्ताक्षर किया.
इसी के साथ ही दोनों प्रधानमंत्रियों की उपस्थिसति में सहयोग से संबद्ध विज्ञान और नवाचार प्रोटोकाल पर हस्तांक्षर किया गया. जिससे भावी वैज्ञानिक आदान-प्रदानों एवं अनुसंधान सहयोग के लिए एक रूपरेखा उपलब्ध हो सकेगी. दोनों नेताओं ने प्रथम संयुक्त विज्ञान पहल खाद्य प्रौद्योगिकियों एवं दुग्ध उत्पादन पर विज्ञान अनुसंधान कार्यशाला का स्वागत किया. जिसका आयोजन न्यूजीलैंड के रिडेट संस्थान/ मैसी विश्वविद्यालय तथा लिंकन विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में किया गया. इस समझौते पर न्यूजीलैंड की भारत में उच्चायुक्त जॉन हेंडरसन और भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव डा. रामासामी ने हस्ताक्षर किया.
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री जॉन के ने 22 फरवरी 2011 को आए विनाशकारी भूकम्प के उपरान्त भारत की सरकार द्वारा न्यू्जीलैंड विशेषकर क्राइस्टचर्च के निवासियों को दिए गए समर्थन और प्रदर्शित सहानुभूति के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को धन्यवाद दिया. दोनों नेताओं ने आपदा तैयारी तथा आपातकालीन अनुक्रिया प्रबंधन प्रणालियों के क्षेत्र में सहयोग के महत्व की पुष्टि की. उन्होंने पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन जैसे क्षेत्रीय मंचों पर दोनों देशों द्वारा मिलकर कार्य करने के महत्व पर भी बल दिया.
प्रधानमंत्रियों ने दोनों देशो के मध्य संवर्धित व्यापार और निवेश प्रवाहों का स्वांगत किया और द्विपक्षीय व्यापार में महत्वपूर्ण विस्तार किए जाने की संभावना पर जोर दिया. दोनों प्रधानमंत्रियों ने मुक्त व्यापार करार (एफटीए) पर चल रही वार्ताओं को शीघ्रातिशीघ्र समाप्त किए जाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. दोनों प्रधानमंत्रियों ने एक दूसरे देश से किए जाने वाले महत्त्वपूर्ण निर्यातों के संपूरक स्वरूप को स्वीकार किया. भविष्य में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद हेतु द्विपक्षीय व्यापार तथा विशेषज्ञता का आदान-प्रदान किए जाने पर जोर दिया.
यात्रा के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने एक नई शिक्षा सहयोग पहल की भी घोषणा की. संयुक्त रूप से वित्तपोषित की जाने वाली एक मिलियन न्यूजीलैंड डालर (लगभग 3.6 करोड़ रुपए) की लागत की इस पहल में भारत और न्यूजीलैंड की समान हिस्सेदारी होगी जिससे उच्च शिक्षा और अनुसंधान तथा कौशल और व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में भागीदारियों को बढ़ावा दिया जा सके. इस पहल में शैक्षिक और विद्यार्थी आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान कार्यकलापों और उद्योग जगत से सहयोग पर विशेष बल दिया जाना है. इस पहल में खेल छात्रवृत्तियों को भी शामिल किया गया है और साथ ही इसमें आदिवासी एवं स्वदेशी उच्च शिक्षा क्षेत्र में विशेषज्ञता एवं अनुभवों के आदान-प्रदान का भी प्रावधान है. प्रधानमंत्री जी की इस पहल को कार्यान्वित करने के लिए एक संयुक्त शिक्षा परिषद की स्थापना करने का निर्णय लिया गया.
दोनों नेताओं ने नागर विमानन क्षेत्र में बेहतर सहयोग का विकास किए जाने का भी स्वागत किया. साथ ही द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को सुदृढ़ बनाने पर अपनी सहमति व्यक्त की तथा न्यूजीलैंड भारत के साथ बेहतर रक्षा संबंधों को सुदृढ़ बनाने के लिए भारत में एक रक्षा सलाहकार नियुक्त करने का निर्णय लिया. दोनों पक्षों ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्ययकता जोर दिया और इस बात पर सहमत हुए कि समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय और वैश्विक सहयोग जारी रहने चाहिए.
प्रधानमंत्री जॉन के ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता में विस्तार किए जाने की स्थिति में भारत की सदस्यता का समर्थन किया. दोनों प्रधानमंत्रियों ने वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा की और सभी देशों के लिए स्थायित्व एवं समृद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय संदर्भों में कार्य करने के महत्त्व पर अपनी सहमति व्यक्त की. दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों की कड़ी भर्त्सना की.
भारत और न्यूजीलैंड पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस), आसियान क्षेत्रीय मंच, आसियान रक्षा मंत्री बैठक प्लस तथा एशिया-यूरोप जैसे विभिन्न क्षेत्रीय निकायों में सहयोग करते रहे हैं. दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक भागीदारी तथा राजनैतिक सम्पर्कों को बढ़ावा देने में इन निकायों के महत्त्व की पुन: पुष्टि की. उन्होंने पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन के तहत व्यापक आर्थिक भागीदारी को आगे बढ़ाने हेतु मिलकर कार्य करने पर अपनी सहमति व्यक्त की.
एक दूसरे देशों के प्रति बेहतर समझबूझ को बढ़ावा देने के लिए न्यूजीलैंड ने न्यूजीलैंड के सबसे प्रेरक नागरिकों में से एक सर एडमंड हिलेरी की याद में फेलोशिप की स्थापना की. प्रधानमंत्री जॉन के ने वर्ष 2011 के लिए यह फेलोशिप किसी प्रतिष्ठित भारतीय व्यवसायी को प्रदान करने का निर्णय लिया. दोनों देशों के संबंधों को और सुदृढ़ बनाने के लिए भारत सरकार ने जनवरी 2011 में न्यूजीलैंड के गवर्नर जनरल को प्रवासी भारतीय सम्मान से सम्मानित किया, जो प्रवासी भारतीयों के लिए सबसे बड़ा सम्मान है.
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