पद्मश्री से सम्मानित मधुबनी चित्रकला की नायिका महासुन्दरी देवी का मधुबनी (बिहार) के रांटी गांव में 4 जुलाई 2013 को निधन हो गया. वह 92 वर्ष की थीं. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ करने का निर्णय लिया. मधुबनी चित्रकला को मिथिला चित्रकला भी कहा जाता है.
महासुन्दरी देवी ने मिथिलांचल की महिलाओं तथा युवा-युवतियों को रोजगार के लिए मधुबनी चित्रकला सीखने को प्रेरित किया.
विश्व प्रसिद्ध कलाकार पिकासो ने उनके बारे में लिखा था कि “लोग मुझे बड़ा कलाकार बताते हैं लेकिन जब मैं आपकी कला को देखता हूं तो पाता हूं कि आप मुझसे भी बड़ी कलाकार हैं.”
प्रसिद्ध कला समीक्षक अवधेश अमन ने इनकी रेखाओं की तारीफ करते हुए कहा कि किसी भी लोक या जनजातीय कला की शैली में इस तरह की रेखाएं दुर्लभ हैं.
इस चित्रकला को विदेशों तक पहुंचाने में पद्मश्री जगदंबा देवी का अमूल्य योगदान रहा है. इसके बाद सीता देवी और गंगा देवी ने भी इस चित्रकला को पहचान दिलाने में अपनी अहम भूमिका निभाई थी. इसी कड़ी में अगला नाम महासुंदरी देवी का था.
मधुबनी चित्रकला के नैसर्गिक स्वरूप को बरकरार रखने और अपनी कृतियों में पारंपरिक रंगों का इस्तेमाल करने में महासुंदरी देवी को महारत हासिल थी. उनके रामायण प्रसंग, राधा-कृष्ण की लीलाएं, और डोली की चित्रकारी अत्यधिक प्रसिद्ध है.
मधुबनी) चित्रकला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करने वालों में महासुंदरी देवी पद्मश्री पाने वाली चौथी महिला कलाकार हैं. मिथिला (मधुबनी) चित्रकला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान करने वालों में महासुंदरी देवी से पहले तीन अन्य महिलाओं को भी पद्मश्री से सम्मानित किया गया है. इसमें जितवारपुर की जगदंबा देवी (1975) व सीता देवी (1980) एवं रसदीपुर की गंगा देवी (1985) शामिल हैं.
पद्मश्री महासुन्दरी देवी से सम्बंधित तथ्य
• महासुन्दरी देवी का जन्म मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखण्ड के चतरा गांव में 16 अप्रैल 1922 में हुआ था. 5 वर्ष की उम्र से ही वह कलाकृति उकेरने में रुचि दिखाने लगी थीं.
• 17 फरवरी 1939 में मधुबनी के रांटी गांव के कृष्ण कुमार दास के साथ उनका विवाह हुआ.
• महासुन्दरी देवी के परिवार में तीन पुत्र, दो पुत्री एवं छह पोता-पोती हैं, जिसमें एक पतोहू विमला दास मधुबनी चित्रकला पर राष्ट्रीय पुरस्कार के अलावा अन्य पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं.
• आभा दास, रूना दास भी मधुबनी चित्रकला की निपुण कलाकार हैं.
• महासुन्दरी देवी ने मधुबनी चित्रकला के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया और देश-विदेश में अपनी कला का लोहा मनवाया.
• महासुंदरी देवी को 24 मार्च 2011 को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा पदमश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
• उन्हें वर्ष 1970 में बिहार राजकीय श्रेष्ठ शिल्प पुरस्कार, 1982 में राष्ट्रपति द्वारा सिद्धहस्त शिल्पी सम्मान, 1997 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा राष्ट्रीय तुलसी सम्मान से सम्मानित किया गया था.
• महासुंदरी देवी को कला की सही पहचान 1961 में भास्कर मुखर्जी ने कराई थी.
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