5 मई 2015 को फ्रांसीसी संसद ने देश की खुफिया सेवाओं को मजबूत करने के लिए एक निगरानी कानून को मंजूरी प्रदान की. इस क़ानून को बनाने का मुख्य उद्देश्य देश में आतंकवादी हमलों को रोकना है.
खुफिया जानकारी एकत्र करने में सहायक इस विधेयक के पक्ष में 438 मत डाले गए इसका मसौदा शार्ली हेब्दो पर जनवरी 2015 में हुए हमले के 3 दिन बाद तैयार किया गया. इस हमले में 17 लोगों की हत्या कर दी गयी थी.
अब सीनेट द्वारा इस कानून की समीक्षा की जाएगी.
निगरानी कानून की विशेषताएं
- इससे ख़ुफ़िया एजेंसियां न्यायिक अनुमति के बिना किसी का भी फ़ोन या ईमेल टेप कर सकेंगी.
- इसके लागू होने के बाद सुरक्षा अधिकारी बिना अदालत की सहमति के किसी भी व्यक्ति या संस्था की निगरानी कर उसकी छान-बीन कर सकते हैं.
- आतंकवाद को काबू में करने के लिए एक नई सुपरवायज़री बॉडी बनाई जाएगी जिसके लिए सुरक्षा एजेंसियां जवाबदेह होंगी.
- देश में इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को किसी भी व्यक्ति या संस्था के संदिग्ध होने की स्थिति में उसे ऑटोमेटिक तरीके से ट्रैक करना होगा.
- किसी भी संदिग्ध व्यक्ति पर नज़र रखने के लिए कैमरा लगाकर उसका पीछा किया जा सकेगा.
टिप्पणी
इस कानून का फ्रांस में पुरजोर विरोध हो रहा है. लोगों का कहना है कि इससे उनके निजी जीवन में दखल बढ़ेगा. इनका मानना है कि इससे सुरक्षा और ख़ुफ़िया एजेंसियां बेहद ताकतवर हो जाएँगी और लोगों को बेवजह तंग करेंगी. आलोचकों का मानना है कि इससे लोकतंत्र के मूल ढांचा प्रभावित होगा और लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी हनन होगा.
यह कानून अमेरिका के 9/11 घटना के बाद पारित किये गए पेट्रियट एक्ट के समान है. फ्रांस के प्रधानमंत्री ने इस बिल का यह कहते हुए समर्थन किया है कि संचार प्रोद्योगिकी के लिए एक विशेष कानून की आवश्यकता थी.

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