बम्बई उच्च न्यायालय ने 14 नवंबर 2014 को महाराष्ट्र में मराठियों एवं मुस्लिमों के आरक्षण पर रोक लगा दी. न्यायालय ने महाराष्ट्र की पूर्ववर्ती सरकार द्वारा लोक सेवा और शैक्षणिक संस्थानों में मराठियों को 16 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले पर रोक लगाने के साथ ही लोक सेवा में मुस्लिमों को पांच प्रतिशत आरक्षण देने पर भी रोक लगा दी.
इस मामले में बम्बई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मोहित शाह की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि, आरक्षण के लिए सर्वोच्च न्यायालय पहले ही सीमा निर्धारित कर चुका है. यह कुल सीटों के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए. इस घोषणा से पूर्व राज्य में कुल 52 प्रतिशत आरक्षण था. पूर्ववर्ती सरकार द्वारा मराठा और मुस्लिम आरक्षण की घोषणा के बाद राज्य में आरक्षण का प्रतिशत 73 हो गया था.
विदित हो कि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव 2014 से पहले पृथ्वीराज चह्वाण के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस-राकांपा सरकार ने उक्त आरक्षण की घोषणा की थी. इसके खिलाफ कई जनहित याचिकाएं न्यायालय में दायर हुईं.
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