भारत और जापान के मध्य व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA: comprehensive economic partnership agreement, सेपा) 1 अगस्त 2011 से लागू हो गया. इस पहल से वर्ष 2014 तक दोनों देशों के बीच व्यापार मौजूदा 12 अरब डॉलर से बढ़कर 25 अरब डॉलर हो जाना है.
व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता के तहत दोनों देशों के बीच 10 साल में आयात-निर्यात होने वाले 94 फीसदी उत्पादों पर शुल्क खत्म हो जाना है. कपड़ा, समुद्री खाद्य पदार्थ और मसाले पर शुल्क खत्म होने से जापान के निर्यातकों को जबकि भारतीय निर्यातकों को आम, खट्टे फल, मसाले, इंस्टेंट चाय, शराब, रसायन, सीमेंट और जेवरात के क्षेत्र में फायदा होना है.
ज्ञातव्य हो कि सिंगापुर और दक्षिण कोरिया के बाद जापान तीसरा व पहला विकसित देश है, जिसके साथ भारत ने व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA: comprehensive economic partnership agreement, सेपा) किया है. वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार यह समझौता पूर्वी एशिया के साथ व्यापक आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने के व्यापक एजेंडे का हिस्सा है.
भारत और जापान के मध्य व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता के तहत जापान द्वारा चावल, गेहूं, तेल, दूध, चीनी, चमड़ा और चमड़े से बने उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दिया जाना है. जबकि भारत वाहन और कृषि से जुड़े क्षेत्रों पर शुल्क कम नहीं करेगा. हालांकि आयातित डीजल इंजन और गीयर बाक्स पर शुल्कों में कटौती की जानी है. डीजल इंजन पर शुल्क को अगले छह साल में मौजूदा 12.5 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया जाना है, वहीं अगले आठ साल में गीयर बाक्स पर शुल्क को मौजूदा 12.5 प्रतिशत से घटाकर 6.5 प्रतिशत किया जाना है.
भारत और जापान के मध्य व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता के तहत कार मफलर्स पर शुल्क को अगले 10 साल में शून्य स्तर पर लाया जाना है जो वर्तमान में 10 प्रतिशत है. जापान सरकार दवा पंजीकरण के क्षेत्र में भारतीय कारोबारियों के आवेदन को अपने कारोबारियों के समकक्ष मानेगी. समझौते से भारतीय पेशेवर जापान के सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विकास में अपनी सेवा और योगदान दे पाएंगे. इस संधि के अनुसार लेखा परीक्षण, अनुसंधान व विकास सेवा, टूरिस्ट गाइड, बाजार अनुसंधान, प्रबंधन परामर्श से जुड़े अनुबंध सेवा प्रदाता और स्वतंत्र पेशेवर जापान में अपनी सेवाएं दे सकेंगे.
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