प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 29 अप्रैल 2015 को भ्रष्टाचार अधिनियम, 1988 में संशोधन करने वाले भ्रष्टाचार (संशोधन) विधेयक, 2013 को मंजूरी प्रदान कर दी.
प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य भ्रष्टाचार से और अधिक कठोर तरीके से निपटना है.
प्रस्तावित संशोधन घरेलू भ्रष्टाचार निरोधक कानूनों को संयुक्त राष्ट्र का भ्रष्टाचार के विरूद्ध सम्मेलन(UNCAC) में भारत द्वारा किए गए दायित्वों को पूरा करने में मदद करेगा.
विधेयक के बारे में
• विधेयक के तहत रिश्वत दाता और रिश्वत लेने वाले दोनों के लिए और अधिक कठोर दंड का प्रावधान किया गया है.
• अब दंडात्मक प्रावधानों के अंतर्गत दी जाने वाली न्यूनतम 6 माह की सजा को बढ़ा कर 3 वर्ष और अधिकतम 5 वर्ष की सजा को बढ़ा कर 7 वर्ष कर दिया गया है.
• भ्रष्टचार के तहत जब्त करने की शक्ति को जिला न्यायालय से निचली अदालत (विशेष न्यायाधीश) को हस्तांतरित कर दिया गया है.
• विधेयक में लोगो को रिश्वत देने से रोकने के लिए वाणिज्यिक संगठनों को कुछ दिशा निर्देश प्रदान किए गए हैं.
• नए विधेयक के अनुसार पिछले 4 वर्षों से किसी मामले पर निर्णय लेने की अवधी को 8 वर्ष से घटा कर 2 वर्ष कर दिया गया है.
• गैर-मौद्रिक परितोषण शब्द को परितोषण की परिभाषा के अंतर्गत शामिल किया गया है.
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