मच्छर जनित ज़ीका विषाणु वर्ष 2016 के जनवरी माह में चर्चा में रहा. यह विषाणु अमेरिकी महाद्वीप तेजी से फैल रहा है.
इस मामले की पुष्टि टेक्सास, यूएसए में लैटिन अमेरिका से लौटे एक यात्री में की गई.
यह विषाणु जान लेवा नहीं है. इस विषाणु से माइक्रोसीफेली नामक बीमारी के जन्म की सम्भावना व्यक्त की जा रही है.
इस बिमारी में नवजात का सर छोटा होता है और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है.
ज़ीका विषाणु के बारे में
• रोग नियंत्रण के लिए केंद्र के अनुसार बुखार, जोड़ों का दर्द, और गुलाबी आँख इस बीमारी के लक्ष्ण हैं.
• यह चिकनगुनिया और डेंगू की तरह मच्छर जनित बीमारी को जन्म देता है.
• यदि एक संक्रमित व्यक्ति एक स्थान से दुसरे स्थान जाता है और यदि वहां उसे कोई दूसरा मच्छर काटता है, तो उस नए क्षेत्र में विषाणु के फैलने की सम्भावना बढ़ जाती है.
• इस विषाणु को पहली बार वर्ष 1947 में युगांडा में पाया गया था.
• यह विषाणु वर्ष 2015 ब्राजील में पाया गया और फिर लैटिन अमेरिका मैं फ़ैल गया.
• विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यूएसए के 14 देशों को इस विषाणु से संक्रमण सूची में शामिल में डाला है.
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