यूरोपीय संघ (ईयू) ने यूक्रेनियाई नेता विक्टर यानुकोविच और पूर्व प्रधानमंत्री माइकोला अजारोव के साथ ही 16 अन्य पूर्व मंत्रियों, व्यवसाइयों और सुरक्षा प्रमुखों की संपत्तियों को अवरुद्ध करने का निर्णय लिया.
इन सबकी संपत्तियाँ धोखाधड़ी के आधार पर अवरुद्ध की गईं, क्योंकि यूक्रेनियाई अधिकारियों को उन पर सरकारी धन के दुरुपयोग और मानवाधिकार-उल्लंघन का शक है.
यह निर्णय यूरोपीय संघ के नेताओं ने ब्रसेल्स में आयोजित एक आपात्कालीन बैठक के दौरान 6 मार्च 2014 को लिया. बैठक यूक्रेन के काला सागर प्रायद्वीप क्रीमिया में व्याप्त संकट पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई थी, जो अभी असल में रूस-समर्थक बलों के कब्जे में है.
इससे पूर्व, ईयू के विदेश मंत्रियों ने 20 फरवरी 2014 को विरोधियों के प्रति हिंसा के लिए जिम्मेदार समझे जाने वाले यूक्रेनियाई अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय किया था.
ये 18 व्यक्ति यूरोपीय संघ के आधिकारिक जर्नल में सूचीबद्ध किए गए थे और इन्हें यूक्रेन की सरकारी निधियों के गबन और उनके यूक्रेन से बाहर अवैध अंतरण के संबंध में अपराधों की जांच के लिए आपराधिक कार्यवाही के भागी लोगों के रूप में लक्ष्य बनाया गया है.
ये प्रतिबंध आरंभिक रूप से 12 महीने की अवधि के लिए इस उद्देश्य से लागू रहेंगे कि यूक्रेन के प्राधिकारियों के लिए अवरुद्ध धन की वसूली करना संभव हो सके.
ऑस्ट्रिया ने भी इसी प्रकार के कदमों की घोषणा की है. स्विस प्राधिकारियों ने भी यानुकोविच और ओलेक्सेंड्र सहित सभी 18 लोगों की संपत्तियाँ अवरुद्ध करने का आदेश दिया है. लीचटेंस्टीन ने भी इन पदाधिकारियों के बैंक-खाते अवरुद्ध कर दिए हैं.
एक अन्य घटनाक्रम में क्रीमिया के दक्षिणी यूक्रेनियाई क्षेत्र में सांसदों ने औपचारिक रूप से रूसी संघ का अंग बनने के लिए मतदान किया है.
यूरोपीय संघ 28 राष्ट्रों का एक संघ है.

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