प्रणव मुखर्जी ने 26 जून 2012 को केन्द्रीय वित्त मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. वह 14वें राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव में उम्मीदवार हैं. वह यूपीए की सरकार में 24 जनवरी 2009 से वित्त मंत्रालय का पदभार संभाल रहे थे. प्रणव मुखर्जी 2004 में यूपीए की सरकार बनने के बाद से लोकसभा में सदन नेता रहे.
प्रणव मुखर्जी का जन्म 13 दिसंबर 1935 को बंगाल के वीरभूम जिले के मिराती गांव में हुआ. उन्होंने राजनीति की अपनी शुरूआत 1969 में की, जब वह पहली बार राज्य सभा से चुनकर संसद में आए थे. उसके बाद वे 3 साल के अंदर ही केंद्र सरकार में औद्योगिक विकास मंत्रालय के उप मंत्री बन गए थे. वह इंदिरा गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह की सरकार में मंत्री रहे. प्रणव मुखर्जी सन 1974 में केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री बने. 1982 में उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया. प्रणव मुखर्जी ने सन 1982-83 के लिए पहला बजट सदन में पेश किया. वह 7 बार कैबिनेट मंत्री रहे. जिसमें 2 बार वाणिज्य मंत्री, 2 बार विदेश मंत्री और एक बार रक्षा मंत्री जैसे महत्वपूर्ण कैबिनेट पद शामिल हैं. वह प्रधान मंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के काल में 24 जून 1991 से 15 मई 1996 योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे. वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक तथा अफ्रीकी विकास बैंक के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य भी रहे.
प्रणव मुखर्जी कांग्रेस पार्टी के सर्वोच्च निकाय (CWC) कार्य समिति के 1978 में सदस्य बने. वह पहली बार जुलाई 1969 में राज्यसभा के लिए चुने गए. उसके बाद वह 1975, 1981, 1993 और 1999 भी राज्यसभा सदस्य रहे. पहली बार वह लोकसभा के लिए पश्चिम बंगाल के जंगीपुर निर्वाचन क्षेत्र से 13 मई 2004 को चुने गए थे और इसी क्षेत्र से दुबारा 2009 में भी लोकसभा के लिए चुने गए. उन्होंने 1986 में राष्ट्रीय कांग्रेस समाजवादी दल का गठन किया था.
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