राष्ट्रीय हरित न्यायाधीकरण ने 18 मार्च 2015 को निर्देश दिया है कि जो भी व्यक्ति रेलवे संपत्ति पर कूडा कचरा फेंकेगा उसे पांच हजार रुपये जुर्माना देने पड़ेंगे. यह फैसला खास कर उन लोगों को ध्यान में रख कर सुनाया गया है, जो रेल लाइन के किनारे रहते हैं और घर के कचरे को रेलवे लाइन पर फेंक देते हैं.
राष्ट्रीय हरित न्यायाधीकरण ने भारतीय रेलवे के हित में एक अहम फैसला सुनाते हुए रेलवे को निर्देश दिया कि वह रेलवे प्लेटफार्मों और रेलवे पटरियों पर कूड़ा या कचड़ा फेंकते पाए जाने वाले व्यक्तियों पर 5000 रुपए का जुर्माना लगाये.
यह आदेश स्वच्छ भारत अभियान को लागू करने के उद्देश्य से दिया गया और इसे राष्ट्रीय हरित न्यायाधीकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा पारित किया गया.
खंडपीठ ने कहा कि रेलवे अधिकारियों का मुख्य कर्तव्य है कि वह स्टेशनों और पटरियों पर स्वच्छ पर्यावरण और स्वच्छता बनाए रखें .
निर्देश निम्न हैं:
रेल पटरियों के आसपास के 46 स्लम बस्तियों में कचरे को इकट्ठा करने के लिए सटीक स्थान की पहचान कर वहां डस्टबीन रखना.
नगर निगम के ठोस कचरे के संग्रहण और निपटान के लिए रेलवे को निर्देश जारी किया गया है कि वह इस कचड़े को इकट्ठा कर परिवहन के मध्यम से उपचार संयंत्रों में पहले कचरे को उपचारित कर फिर इसे सीवर प्रणाली में डाले.
प्लास्टिक उत्पादों और रेलवे पटरियों के आसपास मानव शौच की वजह से प्रदूषण को नियंत्रित करने के क्रम में स्लम बस्तियों के पास मोबाइल शौचालय स्थापित करें.
राष्ट्रीय हरित न्यायाधीकरण खंडपीठ ने यह निर्देश अधिवक्ता सलोनी सिंह और अरुष पठानिया द्वारा दायर एक याचिका जिसमें देश भर में रेलवे प्लेटफॉर्म पर प्लास्टिक उत्पादों की बिक्री पर पूर्ण पाबंदी की मांग के अतिरक्त पटरियों के आसपास लोगों द्वारा खुले में शौच पर प्रतिबंध की मांग की गई थी, की सुनवाई के दौरान जारी किए.
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