विश्व की प्रमुख रेटिंग एजेंसी फिच ने भारत की भविष्य की वित्तीय साख की रेटिंग को स्थिर से घटाकर नकारात्मक कर दिया. फिच ने भारत की यह रेटिंग बीबीबी निगेटिव रखी है. इसने भ्रष्टाचार, अपर्याप्त सुधार, ऊंची मुद्रास्फीति और वृद्धि दर में गिरावट को इसका कारण माना. फिच ने इस आकलन से संबंधित रिपोर्ट 18 जून 2012 जारी की .
फिच के निदेशक आर्ट वू द्वारा जारी बयान में वर्णित है कि भारत की धीमी विकास दर, बढ़ता घाटा, चढ़ती महंगाई और फैसले लेने में राजनीतिक सुस्ती भारत की साख को लगातार कमजोर कर रही है. वर्ष 2014 के आम चुनाव की वजह से सरकार के लिए राजनीतिक तौर पर कड़े आर्थिक निर्णय लेना अब और मुश्किल होगा. यह अन्य विकासशील देशों की तुलना में भारत की वित्तीय हालत को और खराब करेगा.
फिच ने इंडियन ऑयल, ओएनजीसी, एनटीपीसी, सेल, गेल सहित सात प्रमुख सरकारी कंपनियों की साख आकलन नकारात्मक कर दिया है. इससे इन कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय कर्जो पर ब्याज दरें बढ़ेंगी ओर पुराना ऋण भी महंगा होगा.
केंद्र सरकार ने फिच के आउटलुक घटाने के निर्णय को खारिज कर दिया. रेटिंग एजेंसी ने आकलन के लिए पुराने आंकड़ों का इस्तेमाल किया है.
विदित हो कि इससे पहले अप्रैल 2012 में स्टैंर्डड एंड पूअर्स ने भी भारत की साख का परिदृश्य स्थायी से घटाकर नकारात्मक कर दिया था. उसने 11 जून 2012 को चेतावनी भी दी कि भारत की क्रेडिट रेटिंग निवेश ग्रेड से नीचे सट्टेबाजी की श्रेणी में रखने की चेतावनी दी थी. और भारत निवेश स्तर की साख गंवाने वाला पहला ब्रिक देश बन सकता है.
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