संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने 20 नवंबर, 2015 को फ्रांस द्वारा प्रायोजित प्रस्ताव 2249 (2015) को सर्वसम्मति से पारित किया.
इस प्रस्ताव के तहत सभी देशों से इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों और अन्य कट्टरपंथी समूहों और उनके हमलों को रोकने के लिए अपने प्रयास दोगुने करने तथा इस संबंध में समन्वित कार्रवाई की अपील की गई.
प्रस्ताव की विशेषताएं
• प्रस्ताव में कहा गया है कि इस्लामिक स्टेट संगठन अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए एक वैश्विक एवं अभूतपूर्व खतरा है.
• इस प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों से अपील की गई है कि वे ‘इराक और सीरिया में विदेशी आतंकवादी लडाकों के प्रवाह को रोकने के अपने प्रयासों को तेज करें और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकें और दबाएं.
• संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 1999 के बाद से आतंकवाद के संबंध में यह 14वां प्रस्ताव पारित किया गया.
• यह प्रस्ताव सॉसे, ट्यूनीशिया, अंकारा और तुर्की में इस साल इस्लामिक स्टेट द्वारा किए गए इन हमलों की और पूर्व में भी हुए 'भयानक आतंकवादी हमलों' की 'बेहद कड़े शब्दों में स्पष्ट रूप से आलोचना करता है
• इस प्रस्ताव में आतंकवाद के खतरे से सभी माध्यमों का उपयोग करके निपटने को लेकर परिषद की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई.
हालांकि यह प्रस्ताव सैन्य कार्रवाई का अधिकार नहीं देता है क्योंकि यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चैप्टर 7 के तहत तैयार नहीं किया गया. चैप्टर 7 ही एकमात्र ऐसा तरीका है, जिसके माध्यम से संयुक्त राष्ट्र बलों के उपयोग को हरी झंडी दे सकता है.
यह प्रस्ताव ऐसे समय में पारित किया गया है जब एक सप्ताह पहले ही 13 नवंबर 2015 को हिंसक कट्टरपंथियों ने पेरिस में गोलीबारी और बम हमले किए थे जिनमें 130 लोग मारे गए.
इस्लामिक स्टेट समूह ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली. प्रस्तावित पारित किये जाने के कुछ दिन पहले ही बेरुत (लेबनान) में भी दोहरा आत्मघाती हमला हुआ था जिसमें 43 लोग मारे गये थे. इससे पहले एक रूसी विमान पर हमला किया गया था और वह मिस्र के सिनाई प्रायद्वीप में गिरा था. इस घटना में विमान में सवार सभी 224 लोग मारे गये थे. इन दोनों हमलों की जिम्मेदारी भी आईएस ने ली थी..
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