केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एथनॉल ई-85 और ईडी-95 (संदर्भ ईंधन/फ्लेक्स–ईंधन) से जुड़े व्यापक उत्सर्जन मानकों के लिए 19 मई 2015 को एक अधिसूचना जारी की.
इसके तहत मंत्रालय ने दुपहिया, तिपहिया एवं चौपहिया वाहनों के प्रकार (टाइप) के अनुमोदन एवं विस्तार से जुड़ी परीक्षण आवश्यकताओं को अधिसूचित किया. मंत्रालय ने इस तरह के वाहनों के परीक्षण के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले संदर्भ ईंधन ई-85 एवं ईडी-95 की तकनीकी विशिष्टताओं को भी अधिसूचित किया. इस अधिसूचना के फलस्ववरूप वाहन निर्माता जैव-एथनॉल ई-85 एवं ईडी-95 पर चलने वाले वाहन बना सकेंगे. इसका मुख्य उद्देश्य आयातित जीवाश्म ईंधनों पर देश की निर्भरता को कम करना है.
विदित हो कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय वाहनों में अपेक्षाकृत ज्यादा हरित वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल को सुविधाजनक बनाने के लिए सीएमवीआर, 1989 के अंतर्गत आने वाले नियमों को संशोधित कर रहा है. वैकल्पिक ईंधन जैसे एथनॉल, जैव-सीएनजी इत्यादि या तो देश में उत्पादित किये जाते हैं अथवा स्थानीय स्तर पर सृजित किये जाते हैं, जिनमे सौर फोटोवोल्टिक एवं बिजली के अन्य स्रोत शामिल हैं और जिन्हें विद्युत बैटरियों में संग्रहित किया जा सकता है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जैव-एथनॉल पर चलने वाली बस का परीक्षण नागपुर में किया जा रहा है.
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