सर्वोच्च न्यायालय ने 26 अगस्त 2014 को 1983 के अपने फैसले के कार्यान्वयन को वर्ष 2024 तक के लिए स्थगित कर दिया. फैसला सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) आर.एम. लोढ़ा, जस्टिस कुरियन जोसेफ और आर. एफ. नरिमन की पीठ ने दिया.
सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने निर्णय किया कि फैसले के कार्यान्वयन को अगले दस वर्षों तक स्थगित करना ही उचित रहेगा. इसके पीछे कारण यह है कि सर्वोच्च न्यायालय की यह पीठ आगामी दस वर्षों तक धार्मिक भावना को भड़काने के पक्ष में नहीं थी. हालांकि, पीठ ने यूपी पुलिस के महानिदेशक को दोषीपुरा में शांति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया.
विवाद
करीब 136 वर्ष पहले, वाराणसी के दोषीपुरा मे दो कब्रों के साथ जमीन के आठ टुकड़ों पर शिया और सुन्नियों के बीच भूमि विवाद हुआ था.
वर्ष 1878 से, दोषीपुरा में शिया और सुन्नी सड़क और अदालतों में लगातार झगड़ते आ रहे हैं. वर्ष 1981 में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले जिसमें शियाओं को पूर्ण इबादत का अधिकार दिया गया और सुन्नियों को अतिचार करने के लिए मना करने के बाद भी उनकी यह लड़ाई जारी रही.
वर्ष 1983 में सर्वोच्च न्यायालय ने संपत्ति को शिया समुदाय का बताया और दो कब्रों को स्थानांतरित करने की अनुमति दी. फैसले में सुन्नी से संबंधित कब्रों के चारों ओर एक चारदीवारी बनाने का भी आदेश था. वर्ष 1983 का वह फैसला अभी तक लागू नहीं किया गया है.
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